{"_id":"68df4dba983500040401e1ec","slug":"afghanistan-foreign-minister-amir-khan-muttaqi-to-visit-india-on-9-october-taliban-2025-10-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Afghanistan: तालिबान के जरिए पाकिस्तान को घेरने की तैयारी, अफगानिस्तान के विदेश मंत्री का भारत दौरा कितना अहम?","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Afghanistan: तालिबान के जरिए पाकिस्तान को घेरने की तैयारी, अफगानिस्तान के विदेश मंत्री का भारत दौरा कितना अहम?
Fri, 03 Oct 2025 10:11 AM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काबुल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: नितिन गौतम
Updated Fri, 03 Oct 2025 10:11 AM IST
सार
पाकिस्तान, अफगानिस्तान में आतंकी संगठन टीटीपी के ठिकानों पर कई हमले कर चुका है, जिन्हें अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता पर हमले बता रहा है और इससे अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव बढ़ रहा है।
विज्ञापन
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री का भारत दौरा
- फोटो : अमर उजाला
Please wait...
विस्तार
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी अगले हफ्ते भारत दौरे पर नई दिल्ली आएंगे। तालिबान के सत्ता में आने के बाद अफगानिस्तान के किसी नेता की यह पहली आधिकारिक भारत यात्रा होगी। अमीर खान मुत्तकी 9 अक्तूबर को नई दिल्ली आएंगे। उनका ये दौरा 16 अक्तूबर तक चलेगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुत्तकी पिछले महीने नई दिल्ली आने वाले थे, लेकिन संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रतिबंधों के तहत उन पर लगे यात्रा प्रतिबंध के कारण उनकी यात्रा रद्द कर दी गई थी।
सुरक्षा परिषद ने 30 सितंबर को दी यात्रा की मंजूरी
अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा की मंजूरी दे दी है। सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1988 (2011) के तहत तालिबान से जुड़े कुछ लोगों पर यात्रा प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि, परिषद के पास आधिकारिक कर्तव्यों या चिकित्सा कारणों से तालिबानी नेताओं को यात्रा प्रतिबंध में छूट देने का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान में बताया कि 30 सितंबर 2025 को सुरक्षा परिषद समिति ने अमीर खान मुत्तकी की नई दिल्ली यात्रा की मंजूरी दी।
मॉस्को के बाद होगा नई दिल्ली दौरा
अफगानी मीडिया ने बताया कि मुत्तकी 6 अक्तूबर को 'मॉस्को फॉर्मेट वार्ता' के सातवें दौर में भाग लेने के लिए पहले मॉस्को जाएंगे। इसके बाद वे भारत आएंगे। मुत्तकी की यात्रा से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ भारत के संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि भारत ने अभी तक तालिबान को मान्यता नहीं दी है और भारत, काबुल में एक समावेशी सरकार के गठन की वकालत कर रहा है।
विज्ञापन
तालिबान और भारत की नजदीकी के क्या हैं मायने
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री का भारत दौरा नई दिल्ली की भू-राजनीतिक रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। साल 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता कब्जाई थी तो भारत ने उसे मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया था और अपने दूतावास के कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया था। हालांकि पर्दे के पीछे दोनों देशों की सरकारों में बातचीत जारी रही। यही वजह थी कि जून 2022 में, भारत ने पहले काबुल स्थित अपने दूतावास में एक तकनीकी टीम को तैनात कर संपर्क स्थापित किया। उसके बाद भारत के शीर्ष अधिकारियों के अफगानिस्तान दौरे होते रहे। इस साल 15 मई को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहली बार अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के साथ फोन पर बातचीत की। यह दोनों देशों के बीच पहली उच्चस्तरीय बातचीत थी।
अमेरिकी थिंक टैंक विल्सन सेंटर के अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार माइकल कुगलमैन का कहना है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंध ऐसे समय बेहतर हो रहे हैं, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान में आतंकी संगठन टीटीपी के ठिकानों पर कई हमले कर चुका है, जिन्हें अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता पर हमले बता रहा है और इससे अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि नई दिल्ली के तालिबान के साथ बेहतर होते संबंधों में पाकिस्तान एक फैक्टर हो सकता है।
इसके अलावा भारत को मध्य एशिया में अपनी पहुंच बेहतर करने के लिए भी अफगानिस्तान की जरूरत है। भारत अफगानिस्तान और ईरान के चाबहार बंदरगाह की मदद से मध्य एशिया में अपने संपर्क को मजबूत करना चाहता है। साथ ही तालिबानी सत्ता वाला अफगानिस्तान भारत में आतंकवाद बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है। आशंका है कि अफगानिस्तान के कट्टरपंथी समूह भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे सकते हैं। ऐसे में भारत तालिबान सरकार से संबंध बेहतर करके इस आशंका को भी रोकने की कोशिश कर रहा है। भारत, तालिबानी शासन के साथ इस बात को लगातार उठा रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भारत के बाद रूस का दौरा करेंगे मुत्ताकी
रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी अगले हफ्ते अफगानिस्तान सुलह और क्षेत्रीय सहयोग पर एक बैठक में हिस्सा लेने के लिए मास्को जाएंगे। गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफ्रिंग में, विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि मुत्ताकी इस कार्यक्रम के दौरान अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। उन्होंने कहा, 'अफगानिस्तान पर मॉस्को फॉर्मेट परामर्श की सातवीं बैठक 7 अक्तूबर को मॉस्को में होगी, जिसमें अफगानिस्तान, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।' उन्होंने आगे बताया कि बेलारूस के एक प्रतिनिधिमंडल को भी अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
जखारोवा ने कहा कि अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री मुत्ताकी करेंगे, जो इस कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री लावरोव के साथ एक अलग बैठक करेंगे। अफगानिस्तान पर बैठक का उद्घाटन लावरोव करेंगे। जखारोवा के अनुसार, बैठक के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी होने की संभावना है।
विज्ञापन
सुरक्षा परिषद ने 30 सितंबर को दी यात्रा की मंजूरी
अब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अब अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की भारत यात्रा की मंजूरी दे दी है। सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1988 (2011) के तहत तालिबान से जुड़े कुछ लोगों पर यात्रा प्रतिबंध लागू हैं। हालांकि, परिषद के पास आधिकारिक कर्तव्यों या चिकित्सा कारणों से तालिबानी नेताओं को यात्रा प्रतिबंध में छूट देने का अधिकार है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने एक बयान में बताया कि 30 सितंबर 2025 को सुरक्षा परिषद समिति ने अमीर खान मुत्तकी की नई दिल्ली यात्रा की मंजूरी दी।
विज्ञापन
मॉस्को के बाद होगा नई दिल्ली दौरा
अफगानी मीडिया ने बताया कि मुत्तकी 6 अक्तूबर को 'मॉस्को फॉर्मेट वार्ता' के सातवें दौर में भाग लेने के लिए पहले मॉस्को जाएंगे। इसके बाद वे भारत आएंगे। मुत्तकी की यात्रा से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ भारत के संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। हालांकि भारत ने अभी तक तालिबान को मान्यता नहीं दी है और भारत, काबुल में एक समावेशी सरकार के गठन की वकालत कर रहा है।
विज्ञापन
तालिबान और भारत की नजदीकी के क्या हैं मायने
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री का भारत दौरा नई दिल्ली की भू-राजनीतिक रणनीति में बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। साल 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता कब्जाई थी तो भारत ने उसे मान्यता देने से साफ इनकार कर दिया था और अपने दूतावास के कर्मचारियों को भी वापस बुला लिया था। हालांकि पर्दे के पीछे दोनों देशों की सरकारों में बातचीत जारी रही। यही वजह थी कि जून 2022 में, भारत ने पहले काबुल स्थित अपने दूतावास में एक तकनीकी टीम को तैनात कर संपर्क स्थापित किया। उसके बाद भारत के शीर्ष अधिकारियों के अफगानिस्तान दौरे होते रहे। इस साल 15 मई को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहली बार अफगानिस्तान के विदेश मंत्री के साथ फोन पर बातचीत की। यह दोनों देशों के बीच पहली उच्चस्तरीय बातचीत थी।
अमेरिकी थिंक टैंक विल्सन सेंटर के अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार माइकल कुगलमैन का कहना है कि भारत और अफगानिस्तान के बीच संबंध ऐसे समय बेहतर हो रहे हैं, जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव है। पाकिस्तान, अफगानिस्तान में आतंकी संगठन टीटीपी के ठिकानों पर कई हमले कर चुका है, जिन्हें अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता पर हमले बता रहा है और इससे अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव बढ़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि नई दिल्ली के तालिबान के साथ बेहतर होते संबंधों में पाकिस्तान एक फैक्टर हो सकता है।
इसके अलावा भारत को मध्य एशिया में अपनी पहुंच बेहतर करने के लिए भी अफगानिस्तान की जरूरत है। भारत अफगानिस्तान और ईरान के चाबहार बंदरगाह की मदद से मध्य एशिया में अपने संपर्क को मजबूत करना चाहता है। साथ ही तालिबानी सत्ता वाला अफगानिस्तान भारत में आतंकवाद बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकता है। आशंका है कि अफगानिस्तान के कट्टरपंथी समूह भारत में आतंकवाद को बढ़ावा दे सकते हैं। ऐसे में भारत तालिबान सरकार से संबंध बेहतर करके इस आशंका को भी रोकने की कोशिश कर रहा है। भारत, तालिबानी शासन के साथ इस बात को लगातार उठा रहा है कि अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल किसी भी देश के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भारत के बाद रूस का दौरा करेंगे मुत्ताकी
रूसी विदेश मंत्रालय ने बताया है कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी अगले हफ्ते अफगानिस्तान सुलह और क्षेत्रीय सहयोग पर एक बैठक में हिस्सा लेने के लिए मास्को जाएंगे। गुरुवार को एक प्रेस ब्रीफ्रिंग में, विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने कहा कि मुत्ताकी इस कार्यक्रम के दौरान अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। उन्होंने कहा, 'अफगानिस्तान पर मॉस्को फॉर्मेट परामर्श की सातवीं बैठक 7 अक्तूबर को मॉस्को में होगी, जिसमें अफगानिस्तान, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के विशेष प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।' उन्होंने आगे बताया कि बेलारूस के एक प्रतिनिधिमंडल को भी अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है।
जखारोवा ने कहा कि अफगानिस्तान का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री मुत्ताकी करेंगे, जो इस कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री लावरोव के साथ एक अलग बैठक करेंगे। अफगानिस्तान पर बैठक का उद्घाटन लावरोव करेंगे। जखारोवा के अनुसार, बैठक के बाद एक संयुक्त वक्तव्य जारी होने की संभावना है।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन