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अफगानिस्तान: अचानक नहीं हुई तालिबान की वापसी, इशारे को समझ नहीं पाई दुनिया
Sun, 22 Aug 2021 07:03 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली
अमर उजाला रिसर्च डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Sun, 22 Aug 2021 07:03 AM IST
सार
- वर्ष 2017 से 2021 के बीच तालिबान के हमले 1705 गुना बढ़े
- अमेरिकी और नाटो सेनाओं की वापसी के साथ हुआ सक्रिय
- तालिबान द्वारा स्थानीय लोगों पर 2017 के बाद लगातार बढ़ते गए हमले
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तालिबान आंतकी
- फोटो : पीटीआई
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विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी अचानक नहीं हुई है। अमेरिकी सेना की मौजूदगी के बीच पूरी तरह खंडित हो चुका तालिबान खुद को मजबूत करता रहा। स्थानीय लोगों पर हमले कर वह साबित करता रहा कि वो अभी खत्म नहीं हुआ है। बस उसके इशारे को दुनिया समझ नहीं पाई और अब सबकुछ सामने हैं।
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5 साल में 1705 गुना बढ़ा दिए थे हमले
अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी ने 'युद्ध की कीमत' नाम से प्रकाशित रिपोर्ट में बताया है कि वर्ष 2017 से ही तालिबान द्वारा सक्रिय होने लगा था। वर्ष 2017 से 2021 में तालिबान की वापसी से पहले स्थानीय लोगों पर हमलें में 1705 गुना बढ़ गए थे।
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स्थानीय लोगों पर हमले 2017 के बाद लगातार बढ़ते गए
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2017 में 195 दिन में कुल 298 हमले हुए 2018 में 203 दिन में 332 हमले हुए, 2019 में 406 दिन में 207, वर्ष 2020 में 424 दिन में 235 और वर्ष 2021 में दिन में 295 स्थानों पर हो चुके हैं।
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सेनाओं की वापसी के साथ हुआ सक्रिय
अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी अचानक नहीं हुई है। अमेरिकी और नाटो सेनाओं ने अफगानिस्तान से वापसी का ऐलान किया। उसी के बाद से तालिबान ने अपने पैर फिर से मजबूत करने शुरू कर दिए थे। तालिबान की इस तैयारी की किसी को भनक तक नहीं लगी थी। मालूम हो कि अफगानिस्तान पहाड़ी से घिरा देश है जो ईरान के पश्चिमी और पाकिस्तान के पूर्वी सीमा से घिरा है।