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अफगानिस्तान : काबुल में लड़ाकों के डर से जान बचाने के लिए भाग रहे अमेरिकी नागरिक 

Mon, 20 Sep 2021 08:00 AM IST
Kuldeep Singh एजेंसी, काबुल/वाशिंगटन
एजेंसी, काबुल/वाशिंगटन Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 20 Sep 2021 08:00 AM IST
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Afghanistan: American couple running from hiding to save lives every day and night due to fear of Taliban terrorists
काबुल में तालिबानी लड़ाके - फोटो : पीटीआई

कैलिफोर्निया, अमेरिका से ताल्लुक रखने वाला एक जोड़ा तालिबान के डर से काबुल में हर रात अलग घर में बिता रहा है। अचानक तालिबानी हमले के डर से दोनों बारी-बारी से सोते हैं। तीन बच्चों के साथ जी रहे इस ग्रीनकार्ड धारी अमेरिकी जोड़े को हल्की सी आहट से भी डर लगता है। दो सप्ताह में उन्होंने सात घर बदले हैं। खाने-पीने के लिए परिचितों की मदद पर निर्भर हैं। उनका दिन भी घर में कैद रहकर बीतता है।

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अमेरिकी विदेश मंत्री ने माना, हजारों ग्रीन कार्ड धारक व सैकड़ों अमेरिकी नागरिक अब भी अफगानिस्तान में फंसे हैं
अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी ने कई दिन पहले यह बताने के लिए फोन किया था कि उनकी मदद का काम किसी को सौंपा गया है, लेकिन उसके बाद से एक शब्द भी नहीं सुनने को मिला। टेक्सास के एक ग्रीन कार्ड धारक की दादी ने बताया, तालिबानियों ने एक पड़ोसी को घसीटते हुए घर से बाहर निकाल दिया।
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अब उन्हें डर है कि तालिबान को पता लग जाएगा कि उनके बेटे ने कई वर्ष तक अमेरिकी सेना के लिए काम किया है। भले ही तालिबान दावा कर रहा हो कि वह विदेशी नागरिकों और अमेरिका के मददगारों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा। लेकिन, संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार प्रमुख मिशेल बैशलेट कहती हैं कि तालिबान के वादे निरर्थक हैं, असल में वहां वादों के ठीक विपरीत काम हो रहा है। 
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लोगों को धमका रहे हैं तालिबानी दहशतगर्द

बीते सप्ताह काबुल में फंसे ग्रीनकार्ड धारक एक शख्स को तालिबान की तरफ से फोन पर कहा गया कि पता है कि तुम कहां छिपे हो। उन्हें दो भाइयों और माता-पिता के साथ घर छोड़कर भागना पड़ा, क्योंकि वे कई वर्ष तक अमेरिका के लिए सुरक्षा गार्ड मुहैया कराते रहे हैं। विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कांग्रेस में माना था कि अफगानिस्तान में हजारों ग्रीनकार्ड धारक और सैकड़ों अमेरिकी नागरिक फंसे हुए हैं, जिनमें से कई तो मार्च से ही वहां से निकलना चाह रहे हैं और निकलने का खर्च भी खुद वहन करने को तैयार हैं।

जेल में डालने या बेरहमी से कत्ल होने का डर
सभी ने तालिबान के डर से पहचान छिपाए रखी और बताया कि उनकी जिंदगी घरों में कैद रहने तक सिमट गई है। वे हर वक्त डरे रहते हैं। सभी कहते हैं कि किसी भी कीमत पर वे तालिबान के शासन में नहीं रहना चाहते, तालिबानी उनको ढूंढकर जेल में डाल देंगे, या फिर बेरहमी से कत्ल कर देंगे, क्योंकि उन्होंने अमेरिका के लिए काम किया है। इससे भी ज्यादा चिंता उन्हें इस बात की होती है कि बाइडन प्रशासन ने उन्हें बचाने के लिए प्रयास करने का जो वादा किया था, वह भी नहीं निभाया जा रहा है।

जलालाबाद में तालिबानी काफिले पर बम हमला, दो की मौत

अफगानिस्तान में तालिबान राज में रविवार को जलालाबाद के नानगरहार प्रांत में हुए बम धमाके में दो लोगों की मौत हो गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि तालिबान के सीमा निगरानी दस्ते के वाहन को निशाना बनाकर धमाका किया।

लगातार तीसरे दिन ब्लास्ट, पांच लोगों के मारे जाने का दावा
अफगानिस्तान में तालिबान राज के बाद बॉर्डर पुलिस की कमान तालिबान के हाथ में है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस बम धमाके में पांच लोगों की मौत हुई है जिसमें एक बच्चा भी शामिल है। तालिबान ने इस घटना पर अभी तक कुछ भी नहीं कहा है। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि धमाके में एक तालिबानी भी घायल हुआ है।

अफगानिस्तान में ये धमाका तब हुआ जब तालिबान लोगों को आश्वस्त कर रहा है कि उनका जीवन और संपत्ति सुरक्षित है। मालूम हो कि शनिवार को भी हुए बम धमाकों में तीन लोगों की मौत हो गई थी जबकि 21 लोग घायल हो गए थे। अफगानिस्तान में लगातार तीन दिन से हो रहे बम धमाकों से लोगों में दहशत है।

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