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Hindi News ›   World ›   Afghan women no hopes left to flee Kabul and now look forward to a new life under the Taliban

टूटी उम्मीद: काबुल एयरपोर्ट पर बिताए कई दिन, अब तालिबानी राज में ही जीने को तैयार हुईं मायूस महिलाएं

Sat, 28 Aug 2021 09:35 AM IST
प्रशांत कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: प्रशांत कुमार झा Updated Sat, 28 Aug 2021 09:35 AM IST
सार

तालिबानी हुकूमत के बाद लड़ाके काबुल एयरपोर्ट के बाहर सभी रास्तों को बंद कर रखा है। आम राहगीरों की आवाजाही पर भी रोक लगा रखी है। तालिबानियों की इस बर्बरता से लोग डरे और सहमे हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग अफगानिस्तान छोड़ना चाहत हैं, लेकिन वहां से निकलने का उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। लिहाजा तालिबानी राज में रहने को मजबूर हैं। 

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Afghan women no hopes left to flee Kabul and now look forward to a new life under the Taliban
काबुल एयरपोर्ट के बाहर लगी अफगानियों की भीड़ - फोटो : पीटीआई

विस्तार

शिक्षक शिरीन तब्रीक काबुल हवाई अड्डे के बाहर पिछले पांच दिनों से उड़ानों के इंतजार में आंखें गड़ाए बैठी हैं। उन्हें उम्मीद है कि काबुल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाली किसी फ्लाइट के जरिए वह अफगानिस्तान छोड़ देंगी, लेकिन धीरे-धीरे उनकी उम्मीद धूंधली पड़ गई। उन्हें विश्वास हो गया कि अब वह यहां से नहीं निकल पाएंगी।  शगुफ्ता दस्तकगीर भी अफगान छोड़ने के लिए काबुल एयरपोर्ट के बाहर डेरा डाल रखी थी, लेकिन वह भी वहां से नहीं निकल पाई। ऐसे एक या दो नहीं बल्कि सैकड़ों हजारों लोग तालिबानी हुकूमत के बाद अफगानिस्तान छोड़ना चाह रहे हैं, लेकिन उन्हें छोड़ने का कोई विकल्प नहीं दिख रहा। लिहाजा तालिबानी राज में नई जिंदगी शुरू करने के लिए ये अपने-अपने गांव या शहर लौट रहे हैं।

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अफगानिस्तान के एक पूर्व सरकारी अधिकारी की पत्नी फरवरी में पाकिस्तान चली गई थीं। 15 अगस्त को अफगान  पर तालिबान के कब्जे के बाद अमेरिकी कार्रवाई नहीं होने से वह नाराज हैं। उन्हें डर सता रहा है कि अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों की मदद करने वाले लोगों को तालिबान ढूंढकर मार डालेगा। साथ ही महिलाओं और लड़कियों के साथ भी कई घिनौनी वारदातों को अंजाम देगा। पाकिस्तान निवासी महिला तब्रिक का मानना है कि पिछले बार तालिबान जिस तरह लड़कियों और महिलाओं पर अत्याचार किया था और सरिया कानून लागू किया था, वह इस बार भी इसे लागू करेगा। 

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