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तालिबान सीजफायर के लिए सशर्त तैयार, पहले शांति समझौते पर मुहर लगाए अमेरिका

Fri, 17 Jan 2020 04:14 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 17 Jan 2020 04:14 PM IST
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Afghan Taliban ready for conditional ceasefire, ask US first sign on peace treaty
Afghan Taliban Chief mullah haibatullah akhundzada - फोटो : Social Media

तालिबानी नेताओं ने अफगानिस्तान के सामने शर्त रखी है कि अगर एक हफ्ते के भीतर शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने की गारंटी हो, तो वो अगले सात दिनों के लिए अपनी हिंसक गतिविधियां कम कर देंगे। तालिबानी नेता मुल्ला हिबातुल्ला अखुंदजादा के करीबी सूत्रों के हवाले से खबर है कि अफगानिस्तान के प्रमुख शहरों में हिंसक गतिविधियां रोकने के फैसले पर अमल तभी होगा, जब अमेरिका शांति समझौते पर अपनी मुहर लगा दे।

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तालिबान के मुताबिक इस समझौते में विदेशी सैनिकों को अफगानिस्तान से हटाने की शर्त भी होनी चाहिए। तालिबानी नेताओं के करीब रहे अफगानी पत्रकार सामी युसूफ जई के मुताबिक वहां के इस्लामिक जानकारों ने मुल्ला हिबातुल्ला को इस बात के लिए राजी कर लिया है कि वह सात दिनों के लिए इस शर्त पर हिंसक गतिविधियां कम कर दें कि अमेरिका इस दौरान शांति समझौत पर हस्ताक्षर कर दे।

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हिंसक गतिविधियों में कमी के तहत इस दौरान तालिबान अफगानी शहरों पर हमले नहीं करेगा, आत्मघाती हमले रोक देगा और प्रमुख हाईवे को सामान्य तरीके से चलने देगा। इधर दिल्ली में चल रहे रायसीना डॉयलॉग के दौरान अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका की ओर से की जा रही शांति की नई पहल रंग लाएगी।
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दूसरी तरफ अफगान सरकार अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते के लिए लगातार दबाव बना रही है। इसी 15 जनवरी को अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हमदुल्ला मोहिब ने रायसीना डॉयलॉग के दौरान साफ किया था कि हमारे देश के लिए शांति का मतलब पूरी तरह हिंसा का बंद होना है और इसीलिए हम बार बार सीजफायर की बात करते हैं, क्योंकि सार्थक बातचीत तभी संभव है जब इलाके में शांति का माहौल हो।

अफगानी जनता के लिए शांति का मतलब तब है जब वो अपने बच्चों को बेखौफ स्कूल भेज सकें और खुले माहौल में निडर होकर कहीं आ जा सकें। मोहिब ने कहा कि अफगानी राष्ट्रपति अशरफ गनी ने तमाम पड़ोसियों और सहयोगियों से अपील की है कि वो अफगानिस्तान में शांति बहाली में मदद करें। ताकि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा मिल सके।

अफगानी सरकार ने यह भी कहा है कि उसने शांति के लिए वरिष्ठ नेताओं की एक समन्वय समिति भी बनाई है, जो सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रही है। शांति मामलों के मंत्रालय की प्रवक्ता नाजिया अनवारी के मुताबिक मंत्रालय की अगुवाई में बनी समन्वय समिति शांति प्रक्रिया की दिशा में 14 सरकारी पक्षों के साथ बातचीत कर रही है।


उधर, दोहा में तालिबान और अमेरिका के बीच बातचीत के दौरान ईरान से दूरी बनाने और अमेरिकी सेना की वापसी को लेकर तालिबान के सामने कोई शर्त नहीं रखी गई है। रूस के विशेष दूत जामिर कुबुलोव ने भी साफ किया है कि तालिबान सैद्धांतिक तौर पर युद्धविराम के लिए तैयार है, बशर्ते शांति समझौते को अंतिम रूप दिया जा सके।

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