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अफगान तालिबान: हमारे शत्रु हम पर हमला कर रहे हैं, हम युद्ध के लिए बाध्य
Sun, 10 Feb 2019 07:10 PM IST
Trainee Trainee
भाषा, इस्लामाबाद
भाषा, इस्लामाबाद
Published by: Trainee Trainee
Updated Sun, 10 Feb 2019 07:10 PM IST
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- फोटो : dawn
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अफगान तालिबान ने कहा है कि अमेरिका और अन्य क्षेत्रीय शक्तियों के साथ जारी वार्ताओं के बावजूद अब तक ऐसे किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ वैमनस्य तत्काल खत्म हो सके। डॉन न्यूज टीवी ने तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद को यह कहते हुए उद्धृत किया है हम युद्ध के लिए बाध्य हैं। हमारे शत्रु हम पर हमला कर रहे हैं, तो फिर हम भी उनसे लड़ रहे हैं।
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2001 में 9/11 के आतंकी हमले के बाद अमेरिका की अगुवाई में गठबंधन सेनाओं ने अफगानिस्तान में तालिबान के खिलाफ अतिक्रमण किया। तब से अब तक तालिबान फिलहाल युद्ध प्रभावित अफगानिस्तान में सर्वाधिक शक्तिशाली है और देश के करीब आधे हिस्से में उसका नियंत्रण है।
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पिछले माह दोहा में तालिबान के प्रतिनिधियों के साथ छह दिन की बातचीत के बाद ट्वीट की एक श्रृंखला में अफगानिस्तान सुलह सहमति के लिए विशेष अमेरिकी प्रतिनिधि जालमे खलीलजाद ने कहा कि अमेरिका ने तालिबान के साथ शांति वार्ताओं में उल्लेखनीय प्रगति की है।
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खलीलजाद ने कहा था कि हमने फ्रेमवर्क का एक मसौदा बनाया है लेकिन इसे समझौते का रूप देने से पहले इस पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा था कि तालिबान हमारी संतुष्टि के लिए, अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों या लोगों के लिए एक मंच बनने से रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाने की खातिर प्रतिबद्ध है।
खलीलजाद की नियुक्ति सितंबर में हुई थी। तब से वह अमेरिका के इस सबसे लंबे युद्ध को खत्म करने की कोशिश में सभी पक्षों से मिल चुके हैं। 17 साल से अधिक समय से चल रहे इस युद्ध में अमेरिका 2,400 से अधिक सैनिकों को गंवा चुका है।
चैनल की खबर के अनुसार, मुजाहिद का कहना है कि मास्को वार्ता में भी ऐसा कुछ ठोस हासिल नहीं हुआ जिसके चलते वह युद्ध और सैन्य दबाव को खत्म कर पाते। उन्होंने जोर दे कर कहा कि अमेरिका के साथ तालिबान उनकी अपनी पहल पर बातचीत कर रहा है। चैनल के मुताबिक, वार्ता के समय के बारे में पूछे गए एक सवाल पर उग्रवादी कमांडर ने कहा कि अमेरिकी अतिक्रमण से पहले भी तालिबान ने वाशिंगटन से युद्ध के बजाय वार्ता करने के लिए कहा था।
मुजाहिद ने कहा कि उन्होंने बातचीत के लिए 2013 में कतर के दोहा में एक राजनीतिक कार्यालय भी खोला लेकिन वाशिंगटन तब बातचीत करने का इच्छुक नहीं था। प्रवक्ता ने कहा कि अब अमेरिका बातचीत का इच्छुक है तो उन्होंने उनसे वार्ता का फैसला किया।
तालिबान को वार्ता के लिए राजी कराने में पाकिस्तान की भूमिका के बारे में पूछे जाने पर मुजाहिद ने कहा कि किसी बाहरी देश की ओर से कोई भूमिका नहीं निभाई जा रही है। यह हमेशा से हमारी पहल और नीति रही है। उसने हालांकि कहा कि सोवियत अतिक्रमण के दौरान पाकिस्तान अफगान शरणार्थियों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।