{"_id":"61ac8e67e3ae4b1f1a409410","slug":"afghan-boxers-seek-refuge-careers-in-west-say-could-face-retribution-from-the-taliban-if-they-returned-home","type":"story","status":"publish","title_hn":"तालिबान का खौफ: अफगान राष्ट्रीय बॉक्सिंग टीम को जान का खतरा, सर्बिया से नहीं आना चाहती वापस","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
तालिबान का खौफ: अफगान राष्ट्रीय बॉक्सिंग टीम को जान का खतरा, सर्बिया से नहीं आना चाहती वापस
Sun, 05 Dec 2021 03:33 PM IST
मुकेश कुमार झा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बेलग्रेड
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बेलग्रेड
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Sun, 05 Dec 2021 03:33 PM IST
सार
सर्बिया में मौजूद अफगानिस्तान राष्ट्रीय बॉक्सिंग टीम को जान का खतरा सता रहा है। टीम के खिलाड़ियों ने कहा कि हम अफगानिस्तान नहीं जाना चाहते। बाक्सिंग टीम का कहना है कि तालिबान हमें स्वीकार नहीं करते। खिलाड़ियों का कहना है कि अगर वे घर लौटते हैं तो उन्हें तालिबान से प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है।
विज्ञापन
अफगानी मुक्केबाज
- फोटो : social media
विस्तार
अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद खेल और खिलाड़ियों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। सर्बिया में मौजूद अफगानिस्तान राष्ट्रीय बॉक्सिंग टीम को जान का खतरा सता रहा है। टीम के खिलाड़ियों ने कहा कि हम अफगानिस्तान नहीं जाना चाहते। दरअसल, स्वदेश लौटने पर खिलाड़ियों को मारे जाने का डर सता रहा है। अफगानी मुक्केबाजों ने कहा कि नवंबर में आयोजित एआईबीए विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के लिए उन्होंने गुप्त रुप से अभ्यास किया और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में जाने के लिए संघर्ष किया। चैंपियनशिप समाप्ति के बाद अफगानी मुक्केबाज और उनके कोच सर्बिया में ही रह रहे हैं। बाक्सिंग टीम का कहना है कि तालिबान हमें स्वीकार नहीं करते।
विज्ञापन
टीम के खिलाड़ियों का कहना है कि अगर वे घर लौटते हैं तो उन्हें तालिबान से प्रतिशोध का सामना करना पड़ सकता है। यह इसलिए क्योंकि खेल के दौरान तालिबान का नहीं अफगानिस्तान का राष्ट्रीय गान बजा। अब अफगान राष्ट्रीय मुक्केबाजी टीम के सदस्य अपने करियर और अपने जीवन दोनों को बिना किसी खतरे या भय के जारी रखने की उम्मीद में हैं। इसलिए वह यहां शरण मांग रहे हैं। बताया जा रहा है कि उनलोगों का वीजा भी खत्म हो चुका है लेकिन टीम लौटकर वापस स्वदेश नहीं जानी चाहती क्योंकि उसे डर मारे जाने का डर सता रहा है। टीम ने मानवीय वीजा और शरण सुरक्षा हासिल करने के लिए कई विदेशी दूतावासों से संपर्क किया है। कुछ यूरोपीय संघ के देशों ने उन्हें ठुकरा दिया है, लेकिन 11 सदस्यीय समूह ने सुरक्षित पनाहगाह खोजने की उम्मीद नहीं छोड़ी है।
विज्ञापन
इन सब के बीच अफगान राष्ट्रीय मुक्केबाजी टीम का एक सदस्य बीते बुधवार को सर्बिया के स्थानीय जिम में अभ्यास किया। 20 वर्षीय हसीबुल्लाह मलिकजादा ने कहा कि वह अफगानिस्तान वापस जाने से डरते हैं और कहीं और मुक्केबाजी जारी रखना चाहते हैं। उन्होंने कहा, 'मैं अच्छा चैंपियन बनना चाहता हूं और दुनिया भर के बच्चों के लिए एक आदर्श बनना चाहता हूं। मेरा वास्तव में एक अच्छा सपना है।' उधर, अफगानिस्तान के मुक्केबाजी महासंघ के महासचिव वहीदुल्ला हमीदी ने कहा, 'जब तालिबान शासन अफगानिस्तान में आया, तो सब कुछ बदल गया। नए शासन और नई सरकार के दौरान विश्व चैंपियनशिप के लिए आना मुश्किल था।'
विज्ञापन