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‘पश्चिम को महिला अधिकारों की फिक्र नहीं’: अफगान कार्यकर्ता नाराज, कहा- अमेरिका-तालिबान के बीच कई गुप्त सौदे

Sat, 01 Jun 2024 05:15 PM IST
जलज मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 01 Jun 2024 05:15 PM IST
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Afghan activists criticize Western countries for women rights claims US Taliban made many secret agreements
अफगान कार्यकर्ता। - फोटो : ANI

अफगानिस्तान में महिलाओं के अधिकारों का हनन हो रहा है। वहां के हालातों पर कई बार अतंरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई है। इस बीच, एक अफगान अधिकार कार्यकर्ता ने अमेरिका और पश्चिमी देशों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि फरवरी 2020 में अमेरिका और तालिबान के समझौते को देखें तो साफ होता है कि महिलाओं के अधिकार उनके लिए चिंता का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों से लोगों का भरोसा खत्म होता जा रहा है। 

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अमेरिका-तालिबान के साथ कई गुप्त समझौते
बर्लिन में रहने वाले कार्यकर्ता उमर हैदरी ने शनिवार को वीडियो कॉल के माध्यम से एक साक्षात्कार दिया। इस दौरान उन्होनंे कहा कि पश्चिमी देश मानवाधिकार के मुद्दों पर जिम्मेदारी से नहीं बच सकते हैं। अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति काफी कठिन है। अगस्त 2021 में वहां, जो भी हुआ, वह बहुत अप्रत्याशित नहीं था। क्योंकि अफगानिस्तान के प्रति पश्चिमी दुनिया की नीतियों में बहुत बदलाव आए हैं लेकिन चीजें इतनी जल्दी भयावह हो जाएंगी, लोगों को इसकी गति की उम्मीद नहीं थी। दोहा में तालिबान और अमेरिका के बीच हुआ समझौता बताता है कि मानवाधिकार या महिलाओं का अधिकार पश्चिमी देशों के लिए कभी भी महत्वपूर्ण नहीं था। उन्होंने कहा कि तालिबान के साथ कई गुप्त समझौते हुए हैं, जो सबके सामने नहीं रखे गए हैं। 

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पश्चिम देशों ने किया विश्वासघात
यूएन द्वारा दोहा में आयोजित होने वाली बैठक से पहले हैदरी की यह टिप्पणी सामने आई है। उम्मीद है कि बैठक में तालिबान भी शामिल हो सकता है। बता दें, इससे पहले भी दो बार यूएन दो बार दोहा में अफगानिस्तान कॉन्फ्रेंस कर चुका है। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों ने जरूर अफगानी सेना को सैन्य सहायता उपल्बध कराई है लेकिन उन्होंने दोहा में तालिबान को भी राजनीतिक दफ्तर खोलने दिया। उन्होंने आगे कहा कि तालिबान के साथ वे पिछले 10 साल से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि यह कोई नई बात नहीं है। लोगों को पश्चिम से भरोसा खत्म हो गया है। पश्चिमी देशों के फैसले के कारण अफगानी महिलाएं अधिक परेशान हैं। वे याद रखेंगी कि उनके साथ कैसे विश्वासघात किया गया।  

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कई महिला अधिकारी बेरोजगार हुईं
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास तालिबान पर दबाव डालने की शक्ति है। संयुक्त राष्ट्र या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास तालिबान पर दबाव डालने, तालिबान की संपत्तियों, उनकी आवाजाही की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार है। बावजूद इसके उन्होंने देश की आधी आबादी को अलग-थलग कर दिया है। अफगानिस्तान में हजारों महिला प्रोफेसर, शिक्षिका, पत्रकार, वकील, डॉक्टर अब बेरोजगार हैं। कई महिलाएं अपने परिवार की इकलौती कमाऊ थीं। उनका पूरा परिवार बर्बाद हो गया।


पहले महिलाओं का अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान था
तालिबान के कब्जे से पहले देश के अधिकांश क्षेत्र जैसे- मजरा-ए-शरीफ, काबुल, हेरात जैसे क्षेत्रों में अच्छा बाजार था। महिलाएं देश की अर्थव्यवस्था में प्रतिवर्ष लगभग दो बिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान देती थी। तालिबान के कारण बड़ी संख्या में लोग अफगानिस्तान छोड़कर चले गए। देश पर शासन करने वाले लोग लोगों की भलाई को प्राथमिकता नहीं दे रहे हैं।  


विश्व बैंक की रिपोर्ट- अफगानिस्तान में महिलाओं पर करीब 90 प्रतिबंध
विश्व बैंक ने हाल ही में एक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें बताया गया था कि आर्थिक गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी के मामले में अफगानिस्तान दुनिया के 178वें स्थान पर आता है। रिपोर्ट में कुल 190 देशों को शामिल किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व बैंक की रिपोर्ट चिंता पैदा करती है क्योंकि अफगानिस्तान में महिलाओं को वर्तमान में कई दमनकारी नीतियों का सामना करना पड़ा रहा है। अफगानिस्तान में महिलाओं को करीब 90 प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें रोजगार, शिक्षा और मुक्त आंदोलन आदि शामिल हैं। अफगानिस्तान में पिछले दो वर्षों में निजी क्षेत्र और व्यवसायों में महिलाओं की रुचि बढ़ी है। हस्तशिल्प की दुकान चलाने वाली सेदिका तुफान का कहना है कि हस्तशिल्प कार्याशालाओं में नौकरियों की मांग में वृद्धि हुई है, जिसका मुख्य कारण महिलाओं का रोजगार और शिक्षा से वंचित होना है।  

 

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