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बर्लिन में हजारों लोगों पर मंडरा रहा है बे-छत होने का खतरा, मकान मालिकों ने की किराये में बेतहाशा बढ़ोतरी
Wed, 28 Apr 2021 02:43 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्लिन
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Wed, 28 Apr 2021 02:43 PM IST
सार
न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मकान मालिकों ने मई से एक कमरे के फ्लैट के लिए हर महीने किराये में 200 यूरो की बढ़ोतरी कर दी है। ये किराया वे पिछले एक जनवरी से मांग रहे हैं...
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बर्लिन
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
जर्मनी में अदालत के एक फैसले ने बर्लिन के हजारों किरायेदारों के लिए बिना छत के हो जाने का खतरा पैदा कर दिया है। बर्लिन की स्थानीय सरकार ने एक कानून बना कर बर्लिन में मकान के लिए वसूले जा सकने वाले किराये की सीमा तय की थी। कोर्ट ने इस कानून को रद्द कर दिया। इसका मतलब हुआ कि पहले से ही कोरोना महामारी के कारण बेरोजगारी की मार झेल रहे लोगों के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो गई है। बर्लिन में कई मकान मालिक अब पिछली तारीख से बढ़ा हुआ किराया मांग रहे हैं। साथ ही अब से उन्होंने किराये में भारी बढ़ोतरी कर दी है।
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टीवी चैनल यूरो न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक कुछ मकान मालिकों ने मई से एक कमरे के फ्लैट के लिए हर महीने किराये में 200 यूरो की बढ़ोतरी कर दी है। ये किराया वे पिछले एक जनवरी से मांग रहे हैं। ये बढ़ोतरी उस समय हुई है, जब देश में बेरोजगारी की दर ऊंची है। ऐसे में ऐसे लोग बड़ी संख्या में हैं, जिन्हें बढ़ा किराया और उसका बकाया देना अपने वश में नजर नहीं आता।
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बर्लिन में किराये पर सीमा लगाने का कानून फरवरी 2020 में लागू हुआ था। इसके तहत जून 2019 में जो किराया था, उसे ही अगले पांच साल तक बनाए रखने का प्रावधान किया गया। ये कानून बर्लिन की स्थानीय सरकार ने बनाया। वहां की तत्कालीन आवास मंत्री कैट्रिन लोमप्शर ने तब कहा था कि संघीय सरकार के इस दिशा में कदम ना उठाने के कारण स्थानीय सरकार को पहल करनी पड़ी। उन्होंने कहा था कि कानून का मकसद बर्लिन में उन लोगों का रहना आसान करना है, जिनके पास अपना घर नहीं है। लेकिन जर्मनी के संवैधानिक न्यायालय ने इस कानून को रद्द कर दिया। उसके बाद बर्लिन के मौजूदा आवास मंत्री सिबैस्टियन शील ने कहा कि अब ये संघीय सरकार पर है कि या तो वो खुद ऐसा कानून बनाए या इस तरह का कानून बनाने के अधिकार स्थानीय सरकारों को हस्तांतरित कर दे।
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संवैधानिक अदालत ने अपना फैसला इस महीने की 15 तारीख को सुनाया। खबरों के मुताबिक उसके तुरंत बाद मकान मालिकों ने किराया बढ़ाने के नोटिस किरायेदारों को भेजने शुरू कर दिए। बर्लिन के शहरी विकास विभाग के मुताबिक इस कानून के रद्द होने का असर 15 लाख अपार्टमेंट्स पर पड़ेगा। जो लोग भी निजी मकानों में किरायेदार हैं, वे इससे प्रभावित होंगे। लेकिन जो लोग सरकारी योजना के तहत 2014 के बाद बने मकानों में किरायेदार हैं, उन पर इस कानून के रद्द होने का असर नहीं पड़ेगा।
जानकारों के मुताबिक गुजरे एक दशक में जर्मनी में बेघर लोगों की समस्याएं बढ़ी हैं। इसे देखते हुए जर्मनी की स्थानीय सरकार सेफ लिविंग हेल्प योजना शुरू की थी। इसके तहत लोगों को मकान बनाने के लिए अनुदान और कर्ज दिए जाते हैं। अब स्थानीय अधिकारियों ने निजी आवास कंपनियों से कहा है कि वे तुरंत किराया ना बढ़ाएं। लेकिन कंपनियों ने इस अपील को आम तौर पर नजरअंदाज किया है। कुछ कंपनियों ने यह जरूर कहा है कि वे बकाया किराये की मांग नहीं करेंगी, लेकिन अगले महीने से अपने मकानों का किराया बढ़ाएंगी।
इस बीच कुछ जन संगठनों ने उन निजी कंपनियों के राष्ट्रीयकरण की मांग उठा दी है, जो 3000 से अधिक अपार्टमेंट्स की मालिक हैं। एक संगठन ने इस मांग के समर्थन में किरायेदारों के दस्तखत जुटाने का अभियान चला रखा है। ये मुहिम इस साल फरवरी में शुरू की गई। इस संगठन ने बर्लिन प्रशासन से कहा है कि ऐसा कदम उठाने से शहर में आवास की समस्या का तर्कसंगत हल निकल आएगा। जनमत सर्वेक्षणों के मुताबिक बर्लिन के बाशिंदों के बहुमत का समर्थन इस मांग को मिल रहा है।