बांग्लादेश में अदालत ने पहले हिंदू चीफ जस्टिस को ठहराया दोषी, बैंक घोटाले से जुड़ा है मामला
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एक अदालत ने बृहस्पतिवार को बांग्लादेश के पहले हिंदू चीफ जस्टिस सुरेंद्र कुमार सिन्हा को एक बैंक घोटाले के मामले में दोषी घोषित किया। करीब 4 करोड़ टका (करीब 3.52 करोड़ भारतीय रुपये) के गबन से जुड़े इस मामले में ढाका की अदालत ने 10 अन्य लोगों पर भी आरोप सिद्ध पाए हैं। पूर्व चीफ जस्टिस सिन्हा इस समय राजनीतिक शरणार्थी के तौर पर अमेरिका में रह रहे हैं। विशेष जज शेख नजमुल आलम ने आरोप पढ़ने के बाद सुनवाई के लिए 18 अगस्त की अगली तारीख तय कर दी।
बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय से आने वाले सिन्हा जनवरी 2015 से नवंबर 2017 तक देश के 21वें चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यरत रहे थे। उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक आयोग (एसीसी) ने बैंक घोटाले की जांच चालू की थी। एसीसी ने दो उद्योगपतियों के फर्जी कागजातों के जरिये 2016 में बैंक से 4 करोड़ टका कर्ज लेने और इस रकम को सिन्हा के बैंक खाते में जमा कराने के सबूत मिलने का दावा किया था।
सात महीने पहले गिरफ्तारी वारंट किए गए थे जारी
एसीसी ने अदालत में चार्जशीट दाखिल किए थे, जिसके आधार पर ढाका की एक अन्य अदालत ने 69 वर्षीय पूर्व चीफ जस्टिस के खिलाफ सात महीने पहले गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए थे। एसीसी की चार्जशीट में पूर्व चीफ जस्टिस को ‘भगोड़ा’ घोषित किया गया था। बृहस्पतिवार को सरकारी वकील ने कहा, अदालत ने एसके सिन्हा और 10 अन्य के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अब उनके खिलाफ किसान बैंक घोटाले के मामले में ट्रायल चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा, अन्य आरोपियों में छह बैंक के पूर्व अधिकारी हैं, जबकि अन्य सभी सिन्हा के करीबी हैं। सरकारी वकील ने कहा, अदालत में सुनवाई के दौरान केवल 3 ही आरोपी मौजूद रहेंगे, क्योंकि अन्य आरोपी फरार चल रहे हैं।
सिन्हा की विवादित किताब के बाद कार्रवाई
दरअसल सिन्हा के खिलाफ उनकी आत्मकथा ‘द ब्रोकन ड्रीम : रूल ऑफ लॉ, ह्यूमन राइट्स एंड डेमोक्रेसी’ प्रकाशित होने एक दिन बाद भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज किया गया था। किताब में सिन्हा ने बताया था कि 2017 में किस तरह सरकार ने उन्हें जबरन इस्तीफा देने पर मजबूर किया था। उनकी आत्मकथा पर बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने तीखी टिप्पणी की थी।