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विश्व का पहला मामला: दूसरी बार कोविड संक्रमण होने के बाद 89 वर्षीय डच महिला की मौत
Wed, 14 Oct 2020 08:44 AM IST
अमर शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एम्स्टर्डम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, एम्स्टर्डम
Published by: अमर शर्मा
Updated Wed, 14 Oct 2020 08:44 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
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ऐसा माना जा रहा है कि एक 89 वर्षीय डच महिला कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद मरने वाली दुनिया की पहली व्यक्ति बन गई है।
उस समय महिला कैंसर का इलाज करवा रही थी। उसे दो अलग-अलग प्रकरणों में कोरोना वायरस के 'आनुवांशिक रूप से भिन्न' उपभेदों से संक्रमित पाया गया था, जो दो महीने बाद हुआ था।
क्या लोग कोविड-19 से दोबारा संक्रमित हो सकते हैं। यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। इस मामले में रिपोर्ट संदेहास्पद बनी हुई है जिससे पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ।
इस मामले में, अस्पताल में पहली और दूसरी बार आने के बीच की अवधि में महिला कोरोना वायरस परीक्षण में कभी भी नेटेगिवट नहीं पाई गई थी।
परीक्षण में नेगेटिव पाए जाने पर डॉक्टर यह साबित करने के नजदीक पहुंचते कि पहली बार संक्रमित होने के बाद वह ठीक हो गई होंगी। और दूसरा बार भर्ती होने पर वायरस फिर से पैदा नहीं हुआ, जिससे वह अभी भी संक्रमित होंगी।
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कोविड-19 के परीक्षण के बाद पहली बार पॉजिटिव पाए जाने पर जब अस्पताल गईं तो उन्हें बुखार और बहुत बुरी खांसी थी। महिला के ये लक्षण गायब हो गए और वह पांच दिनों के बाद घर चली गई।
वह 59 दिनों बाद उसी लक्षण के साथ अस्पताल दोबारा लौटीं। यह उनके लिम्फोमा के लिए एक नया कीमोथेरेपी उपचार शुरू करने के दो दिन बाद था। वह कोविड-19 के टेस्ट में फिर से पॉजिटिव पाई गईं और तीन सप्ताह बाद उसकी मृत्यु हो गई।
उसकी रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि कोरोना वायरस टेस्ट के दोनों परीक्षणों के लिए लिए गए नमूने आनुवंशिक रूप से अलग थे। उन्होंने दावा किया, "इसकी संभावना है कि लंबे समय तक बीमार रहने की बजाय वह फिर से संक्रमित हुई हों।"
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में डॉक्टरों ने नेवादा में 25 वर्षीय व्यक्ति की बीमारी का हवाला देते हुए कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होने के पहले मामले की पुष्टि की है।
इस रिपोर्ट को बनाने वालों में नीदरलैंड के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों शामिल थे, जिसका नेतृत्व वेल्धोवेन में PAMM प्रयोगशालाओं में डॉ. मारजोलिजेन वेगडैम-ब्लान्स ने किया।
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उस समय महिला कैंसर का इलाज करवा रही थी। उसे दो अलग-अलग प्रकरणों में कोरोना वायरस के 'आनुवांशिक रूप से भिन्न' उपभेदों से संक्रमित पाया गया था, जो दो महीने बाद हुआ था।
क्या लोग कोविड-19 से दोबारा संक्रमित हो सकते हैं। यह अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। इस मामले में रिपोर्ट संदेहास्पद बनी हुई है जिससे पता चल सके कि वास्तव में क्या हुआ।
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इस मामले में, अस्पताल में पहली और दूसरी बार आने के बीच की अवधि में महिला कोरोना वायरस परीक्षण में कभी भी नेटेगिवट नहीं पाई गई थी।
परीक्षण में नेगेटिव पाए जाने पर डॉक्टर यह साबित करने के नजदीक पहुंचते कि पहली बार संक्रमित होने के बाद वह ठीक हो गई होंगी। और दूसरा बार भर्ती होने पर वायरस फिर से पैदा नहीं हुआ, जिससे वह अभी भी संक्रमित होंगी।
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कोविड-19 के परीक्षण के बाद पहली बार पॉजिटिव पाए जाने पर जब अस्पताल गईं तो उन्हें बुखार और बहुत बुरी खांसी थी। महिला के ये लक्षण गायब हो गए और वह पांच दिनों के बाद घर चली गई।
वह 59 दिनों बाद उसी लक्षण के साथ अस्पताल दोबारा लौटीं। यह उनके लिम्फोमा के लिए एक नया कीमोथेरेपी उपचार शुरू करने के दो दिन बाद था। वह कोविड-19 के टेस्ट में फिर से पॉजिटिव पाई गईं और तीन सप्ताह बाद उसकी मृत्यु हो गई।
उसकी रिपोर्ट तैयार करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि कोरोना वायरस टेस्ट के दोनों परीक्षणों के लिए लिए गए नमूने आनुवंशिक रूप से अलग थे। उन्होंने दावा किया, "इसकी संभावना है कि लंबे समय तक बीमार रहने की बजाय वह फिर से संक्रमित हुई हों।"
यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका में डॉक्टरों ने नेवादा में 25 वर्षीय व्यक्ति की बीमारी का हवाला देते हुए कोरोना वायरस से दोबारा संक्रमित होने के पहले मामले की पुष्टि की है।
इस रिपोर्ट को बनाने वालों में नीदरलैंड के विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों शामिल थे, जिसका नेतृत्व वेल्धोवेन में PAMM प्रयोगशालाओं में डॉ. मारजोलिजेन वेगडैम-ब्लान्स ने किया।