Pakistan: पाकिस्तान में जमीन को लेकर दो पक्षों में हिंसक झड़प, 36 लोगों की मौत, 80 घायल
जुलाई में बोशेहरा और मालीखेल जनजातियों के बीच हुई झड़पो में कम से कम 50 लोग मारे गए थे और 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इसके बाद यह लड़ाई बालिशखेल, सद्दा, खार कल्लाय, पीवर और मकबल जैसे क्षेत्रों में फैल गई।
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पाकिस्तान के अशांत उत्तर पश्चिमी कुर्रम जिले में जमीन के टुकड़े को लेकर दो जनजातियों के बीच पिछले छह दिन से जारी हिंसक झड़प में 36 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 80 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने बताया कि सरकार और आदिवासी बुजुर्गों के स्थिति को शांत करने प्रयास बावजूद झड़पें बढ़ती जा रही हैं।
जुलाई में बोशेहरा और मालीखेल जनजातियों के बीच हुई झड़पो में कम से कम 50 लोग मारे गए थे और 250 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। इसके बाद यह लड़ाई बालिशखेल, सद्दा, खार कल्लाय, पीवर और मकबल जैसे क्षेत्रों में फैल गई। दोनों पक्षों के आदिवासी बुजुर्गों ने संघर्ष को रोकने के लिए पुलिस उप महानिरीक्षक और आयुक्त कोहाट से मुलाकात की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
झड़पों के बीच गुरुवार को तहसील क्षेत्रों में भारी गोलीबारी हुई। इसमें छह लोगों की मौत हुई और 10 लोग घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक इस दौरान दोनों पक्षों ने छोटे-बड़े हथियारों से एक-दूसरे को निशाना बनाया। इसके चलते पाराचिनार-पेशावर मुख्य सड़क और पाक-अफगान खारलाची सीमा बंद हो गई। पुलिस ने बताया कि नाकेबंदी के कारण भोजन, ईंधन और दवाओं सहित आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है। पाराचिनार शहर सहित प्रभावित क्षेत्रों में निजी और सार्वजनिक दोनों स्कूल छह दिनों के लिए बंद कर दिए गए हैं।
उपायुक्त जावेदुल्ला महसूद ने कहा कि संघर्ष विराम के लिए प्रयास जारी हैं। जिला प्रशासन, पुलिस, सैन्य नेतृत्व और आदिवासी बुजुर्ग क्षेत्र में शांति के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी बुजुर्गों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को बात करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में भेजा गया है। वहीं कुर्रम बार एसोसिएशन ने आदिवासी झड़पों और अराजकता को लेकर स्थानीय अदालत का रुख किया।
कुर्रम खैबर पख्तूनख्वा के उत्तर-पश्चिमी प्रांत का एक क्षेत्र है, जो अफगानिस्तान के साथ लंबी सीमा साझा करता है। यहां जनजातियों और धार्मिक समूहों के बीच सांप्रदायिक झड़प और आतंकवादी हमले होते रहे हैं। जुलाई में यहां हुई लड़ाई सांप्रदायिक झड़पों में बदल गई और पीवर, तांगी, बालिशखेल, खार कलाय, मकबल, कुंज अलीज़ई, पारा चमकानी और करमन सहित अन्य क्षेत्रों में फैल गई। नेताओं की मध्यस्थता से हुए शांति समझौते पर दोनों पक्षों के सहमत होने के बाद यह रुक गई थी।
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