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Hindi News ›   World ›   29 April 2020 Asteroid Nasa News: A big asteroid to pass earth from a narrow distance on Tuesday morning

Asteroid 1998 OR2 : कल पृथ्वी के पास से गुजरेगा पहाड़ के आकार का उल्कापिंड

Tue, 28 Apr 2020 05:09 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 28 Apr 2020 05:09 PM IST
सार

29 अप्रैल यानी बुधवार को एक बहुत बड़े आकार का उल्कापिंड (एस्टरॉयड) पृथ्वी के पास से गुजरेगा। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक यह उल्कापिंड करीब 19 हजार किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से गुजरेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक इस उल्कापिंड की धरती से टकराने की कोई संभावना नहीं है, इसलिए लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

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29 April 2020 Asteroid Nasa News: A big asteroid to pass  earth from a narrow distance on Tuesday morning
Asteroid Nasa - फोटो : Nasa

विस्तार

नासा के सेंटर फॉर नियर अर्थ स्टडीज के मुताबिक उल्कापिंड 29 अप्रैल की सुबह 5:56 बजे (ईस्टर्न टाइम) धरती के पास से गुजरेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी विशाल पर्वत के आकार का यह उल्कापिंड अगर यह पृथ्वी से टकराया तो पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा। 

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हालांकि, इसके पृथ्वी से टकराने की संभावना न के बराबर है। 

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वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसे उल्कापिंड की हर सौ साल में पृथ्वी से टकराने की 50 हजार संभावनाएं होती हैं।  लेकिन पृथ्वी के ज्ञात इतिहास में ऐसा बहुत ही कम बार हुआ है कि इतना बड़ा उल्कापिंड पृथ्वी से टकराया हो। कुछ मीटर व्यास वाले उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में आते हैं, लेकिन वे तुरंत जल जाते हैं और उनके छोटे-छोटे टुकड़े ही पृथ्वी की सतह तक पहुंच पाते हैं।  
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इस उल्कापिंड का नाम 1998 आरओ2 ( 1998 RO2 ) है। इसके के पृथ्वी के पास से गुजरने की जानकारी वैज्ञानिकों ने करीब डेढ़ महीने पहले दे दी थी। तब बताया गया था कि इसका आकार किसी बड़े पहाड़ जितना है। इसके साथ ही इसकी रफ्तार को देखते हुए आशंका जताई गई थी कि जिस गति से यह उल्कापिंड बढ़ रहा है, अगर पृथ्वी को छूकर भी निकला तो सूनामी भी आ सकती है। 

 

इस खगोलीय घटना को नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता है। टेलीस्कोप की मदद से ही लोग इसे देख सकते हैं। नासा को इस खगोलीय पिंड के बारे में साल 1998 में ही पता चल गया था। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसका नाम 52768 और 1998 ओआर-2 दिया है। इसकी कक्षा चपटे आकार की है। 1998 से वैज्ञानिक इसका लगातार अध्ययन कर रहे हैं।

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