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US: 1971 में बंगाली हिंदुओं पर हुए अत्याचार को 'नरसंहार' घोषित करने की मांग, अमेरिकी संसद में पेश हुआ प्रस्ताव

Sun, 22 Mar 2026 07:39 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अमन तिवारी Updated Sun, 22 Mar 2026 07:39 AM IST
सार

अमेरिकी सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने 1971 में पाकिस्तानी सेना की क्रूरता को नरसंहार घोषित करने के लिए प्रस्ताव पेश किया है। इसमें बंगाली हिंदुओं पर हुए अत्याचारों, हत्याओं और महिलाओं के साथ हिंसा का जिक्र है। प्रस्ताव में राष्ट्रपति से इन घटनाओं को आधिकारिक तौर पर मानवता के खिलाफ अपराध मानने की अपील की गई है।

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1971 bengali hindus genocide recognition greg landsman us house resolution Bangladesh Jamaat-e-Islami US
अमेरिकी संसद - फोटो : ANI

विस्तार

अमेरिका के एक सांसद ग्रेग लैंड्समैन ने प्रतिनिधि सभा में एक प्रस्ताव पेश किया है। इस प्रस्ताव में मांग की गई है कि 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी सेना और उसके सहयोगी संगठन जमात-ए-इस्लामी ने बंगाली हिंदुओं पर जो जुल्म किए थे, उन्हें युद्ध अपराध और नरसंहार के रूप में मान्यता दी जाए।
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प्रस्ताव में क्या है?
ओहियो से डेमोक्रेट सांसद लैंड्समैन ने शुक्रवार को यह प्रस्ताव रखा। अब इसे आगे की चर्चा के लिए विदेश मामलों की समिति को भेज दिया गया है। प्रस्ताव में विस्तार से बताया गया है कि 25 मार्च 1971 की रात पाकिस्तान सरकार ने शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया था। इसके तुरंत बाद पाकिस्तानी सेना और कट्टरपंथी समूहों ने पूरे पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में 'ऑपरेशन सर्चलाइट' शुरू किया। इस अभियान के तहत आम नागरिकों का बड़े पैमाने पर नरसंहार किया गया।
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पुराने दस्तावेजों का किया जिक्र
प्रस्ताव में इतिहास के कुछ अहम दस्तावेजों का भी जिक्र है। इसमें बताया गया कि 28 मार्च 1971 को ढाका में तैनात अमेरिकी महावाणिज्य दूत आर्चर ब्लड ने वाशिंगटन को एक टेलीग्राम भेजा था। इसका शीर्षक 'चुनिंदा नरसंहार' (सिलेक्टिव जेनोसाइड) था। उन्होंने लिखा था कि पाकिस्तानी सेना के समर्थन से गैर-बंगाली मुस्लिम गरीब बस्तियों पर हमले कर रहे हैं और बंगालियों व हिंदुओं की हत्या कर रहे हैं।
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इसके बाद 6 अप्रैल 1971 को आर्चर ब्लड ने एक और टेलीग्राम भेजा, जिसे 'ब्लड टेलीग्राम' के नाम से जाना गया। इसमें उन्होंने इस संघर्ष पर अमेरिकी सरकार की चुप्पी पर आपत्ति जताते हुए एक संदेश भेजा, जिस पर ढाका स्थित महावाणिज्य दूतावास के 20 सदस्यों के हस्ताक्षर थे। लेकिन अमेरिका इसे किसी देश का आंतरिक मामला मानकर चुप बैठा है।

सांसद अमेरिकी राष्ट्रपति से की अपील
सांसद लैंड्समैन के प्रस्ताव में कहा गया है कि पाकिस्तानी सेना ने धर्म और लिंग की परवाह किए बिना बंगालियों की हत्या की। उन्होंने राजनीतिक नेताओं, बुद्धिजीवियों, डॉक्टरों और छात्रों को चुन-चुनकर मारा। हजारों महिलाओं को अपनी गुलाम बनने के लिए मजबूर किया। प्रस्ताव में विशेष रूप से उल्लेख है कि हिंदू अल्पसंख्यकों को खत्म करने के लिए उन्हें निशाना बनाया गया। उनके साथ सामूहिक बलात्कार हुए, जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया और उन्हें देश छोड़ने पर मजबूर किया गया। लैंड्समैन ने अमेरिकी राष्ट्रपति से अपील की है कि वे 1971 में बंगाली हिंदुओं के खिलाफ हुई इन घटनाओं को आधिकारिक तौर पर मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के रूप में स्वीकार करें।

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