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Lok Sabha elections 2024: अब ये भी करेंगे विपक्षी नेताओं से मुलाकात, क्या पीएम पद की दावेदारी है निशाना?

Mon, 22 May 2023 07:36 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Mon, 22 May 2023 07:36 PM IST
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सार
Lok Sabha elections 2024: आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि उनकी पार्टी केंद्र सरकार के अध्यादेश पर पूरे देश में जनसमर्थन जुटाने की कोशिश करेगी। इसके लिए अरविंद केजरीवाल 23 मई को ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे...
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Lok Sabha elections 2024: arvind kejriwal will meet opposition leaders
Lok Sabha elections 2024: Mamata Banarjee with Arvind Kejriwal - फोटो : Agency (File Photo)

विस्तार

नीतीश कुमार 2024 के चुनाव को लेकर विपक्षी दल के नेताओं से मुलाकात कर रहे हैं। इसे उनकी प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन इसी बीच एक और नेता अरविंद केजरीवाल विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात करने की राष्ट्रव्यापी मुहिम पर निकल रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने इसे दिल्ली पर केंद्र सरकार द्वारा लाये गए अध्यादेश के विरुद्ध सभी दलों को जोड़ने की कोशिश बताया है। लेकिन, चूंकि आम आदमी पार्टी ने बार-बार केजरीवाल को पीएम पद के मजबूत दावेदार के रूप में पेश करने की कोशिश की है, इसे अगले चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।

क्या है पार्टी का प्लान?

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेंस कर बताया कि उनकी पार्टी केंद्र सरकार के अध्यादेश पर पूरे देश में जनसमर्थन जुटाने की कोशिश करेगी। इसके लिए अरविंद केजरीवाल 23 मई को ममता बनर्जी से मुलाकात करेंगे। इसी क्रम में अरविंद केजरीवाल 24 मई को उद्धव ठाकरे और 25 मई को शरद पवार से मुलाकात करेंगे।

आम आदमी पार्टी की यह कोशिश इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार के पास राज्य सभा में बहुमत नहीं है। दिल्ली में अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग का जो अध्यादेश केंद्र सरकार लाई है, उसे वह अकेले संसद में पास नहीं करा सकती। इसके लिए उसे विपक्षी दलों के सहयोग की आवश्यकता पड़ेगी।

यह भी पढ़ें: Congress: आम आदमी पार्टी के मुद्दों पर कांग्रेस ने रची सियासी राह, 'पंच मंत्र' से निकालेगी सत्ता के लिए रास्ता

लेकिन यदि इसी बीच अरविंद केजरीवाल सभी विपक्षी दलों को अपने साथ लाने में सफल रहते हैं, तो यह अगले लोकसभा चुनाव के पूर्व विपक्षी दलों की एकता के तौर पर एक बड़ा संदेश होगा। चूंकि इस कोशिश की पहल केजरीवाल की अगुवाई में किया जाएगा, वे विपक्ष के एक बड़े नेता के तौर पर उभर कर सामने आ सकते हैं।

वहीं, यदि अरविंद केजरीवाल और नीतीश कुमार इस मुद्दे पर सभी दलों को एक साथ लाने में नाकाम होते हैं, तो विपक्षी दलों की एकता पर बड़े प्रश्न भी पैदा कर देगा। भाजपा इसे जनता के बीच विपक्षी दलों की आपसी असहमति के रूप में पेश करने का कोई अवसर नहीं चुकेगी।    

आसान नहीं ये काम

राजनीतिक विश्लेषक संतोष कुमार ने कहा कि राजनीति में बहुत कुछ स्पष्ट नहीं होता है। मंजे नेता इसी तरह के कदमों से अपनी राजनीतिक हैसियत का अंदाजा लगाते हैं। इसी प्रकार भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहीम की शुरुआत कर केजरीवाल पहले भी मुख्यमंत्री पद तक पहुंच चुके हैं। यदि वे संसद में केंद्र का अध्यादेश पास होने से रोक पाते हैं, तो विपक्षी दलों के नेताओं के बीच उनका राजनीतिक कद अचानक बहुत बड़ा हो जाएगा।

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हालांकि, पूर्व में बेहद संवेदनशील बिल को पास कराने में केंद्र ने जिस राजनीतिक कौशल का परिचय दिया है, उसे देखते हुए यह काम आसान नहीं लगता। यदि केंद्र सरकार बिल पास कराने में असफल होती है, तो लोकसभा चुनाव के पहले ही यह उसके लिए बड़ी हार जैसी बात होगी और केंद्र सरकार ऐसा कभी नहीं होने देगी, लिहाजा इस अध्यादेश को पास कराने के लिए वह अपनी पूरी राजनीतिक चतुराई का परिचय देगी।

हसीन सपने देख रहे केजरीवाल

भाजपा नेता हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक जमीन दिल्ली में ही खिसक चुकी है। यदि इसके बाद भी वे प्रधानमंत्री पद की दौड़ में स्वयं को आगे बढ़ाते हैं, तो इसे केवल सपना ही कहा जाएगा। उन्होंने कहा कि देश की जनता पूरी मजबूती के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़ी है और देश एक बार फिर उन्हें ही पीएम के रूप में देखना चाहता है। भाजपा नेता ने दावा किया कि वे दिल्ली में सभी सातों सीटें पहले से ज्यादा बड़े बहुमत से जीतेंगे, ऐसे में विपक्षी दलों की एकता का कोई अर्थ नहीं है।

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