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Jaishankar gives a befitting reply regarding Zelenskyy and Trump! What did the External Affairs Minister say a
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जेलेंस्की-ट्रंप को जयशंकर ने दिया मुड़तोड़ जवाब! रूसी तेल की खरीद पर क्या बोले विदेश मंत्री?
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने एक बार फिर बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान का संदेश दिया है। यूक्रेन के दौरे पर पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार शाम राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की। कीव में हुई इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का स्वागत किया और रूस-यूक्रेन युद्ध समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा की।
जेलेंस्की ने मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा करते हुए रूस के साथ जारी युद्ध को खत्म करने के भारत के समर्थन के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह युद्ध खत्म होना चाहिए और एक भरोसेमंद शांति स्थापित करने की जरूरत है। जेलेंस्की ने भारत से इस दिशा में अपना समर्थन जारी रखने की उम्मीद भी जताई।
राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात से पहले जयशंकर ने यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के शांतिपूर्ण समाधान के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का स्पष्ट संदेश रहा कि युद्ध का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि बातचीत, कूटनीति और समझौते के जरिए ही निकाला जा सकता है।
लेकिन इस दौरे के दौरान जयशंकर से जब रूस से तेल खरीदने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने भारत का रुख बेहद स्पष्ट शब्दों में सामने रखा। जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष का समाधान इस बात से नहीं होगा कि कोई देश रूस से तेल, खनिज या दूसरी वस्तुएं खरीदता है या नहीं। उनके मुताबिक इस संघर्ष का समाधान केवल संवाद, कूटनीति और बातचीत के जरिए संभव है।
जयशंकर ने भारत की ऊर्जा जरूरतों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना भारत के लिए बड़ी चुनौती है और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना सरकार की पहली प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने कहा कि भारत यूक्रेन के दृष्टिकोण का सम्मान करता है और उम्मीद करता है कि दूसरे देश भी भारत के नजरिए का सम्मान करेंगे।
दरअसल, रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर अमेरिका की तरफ से दबाव बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने रूस और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े एक विधेयक को भारी बहुमत से पारित किया। प्रस्ताव के तहत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों के आयात पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को मिल सकता है। भारत और चीन रूस के प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल हैं।
इसी बीच भारत-अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के काउंसलर पीटर नवारो ने कहा है कि डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं और दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े टैरिफ के मुद्दे को सुलझा लेंगे। वहीं भारत की ओर से कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिबंध विधेयक अभी विधायी प्रक्रिया का हिस्सा है और भारत इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर नियमित बातचीत जारी है।
वहीं जेलेंस्की ने जयशंकर से मुलाकात के दौरान ब्लैक सी की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आम नागरिकों के जहाजों और खाद्य आपूर्ति से जुड़े खतरों पर चिंता जताई। जेलेंस्की का कहना है कि बंदरगाहों, फूड कॉरिडोर और सप्लाई को बाधित करने की कोशिशों से वैश्विक संबंधों पर असर पड़ रहा है।
जयशंकर का यह दौरा 3 से 5 सितंबर तक चलेगा। इस दौरान वह यूक्रेन और पोलैंड की यात्रा कर रहे हैं। दौरे का मकसद दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और क्षेत्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा करना है।
कुल मिलाकर, जयशंकर के कीव दौरे ने भारत के संतुलित कूटनीतिक रुख को एक बार फिर सामने रखा है। एक तरफ भारत युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति को समाधान का रास्ता बता रहा है, तो दूसरी तरफ अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को लेकर भी स्पष्ट रुख अपना रहा है।
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