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Imran Khan's party to stage protest in Islamabad; what is the plan of Shahbaz and Munir?
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इमरान खान की पार्टी करेगी इस्लामाबाद में प्रोटेस्ट, शहबाज-मुनीर ने बनाया 'खूनी' प्लान?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम
Published by: Adarsh Jha
Updated Wed, 23 Sep 2026 10:31 PM IST
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पाकिस्तान में 27 सितंबर की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही है, राजनीतिक तनाव बढ़ता जा रहा है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी PTI ने इस दिन इस्लामाबाद में बड़े प्रदर्शन और मार्च का ऐलान किया है। पार्टी की मांग इमरान खान की रिहाई और संविधान की सर्वोच्चता से जुड़ी है। दूसरी तरफ सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि वह राजधानी में बड़े मार्च को रोकने के लिए सुरक्षा इंतजाम कर रही है। इसी बीच इस्लामाबाद के अस्पतालों को संभावित बड़े पैमाने की आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए जाने की खबर सामने आई है।
सबसे बड़ा सवाल अस्पतालों की तैयारियों को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक, संघीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने राजधानी के अस्पतालों को संभावित “मास कैजुअल्टी इवेंट” यानी बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने जैसी आपात स्थिति के लिए तैयारी करने को कहा है। अस्पतालों में अतिरिक्त बेड की व्यवस्था, सर्जिकल विभागों को तैयार रखने और मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश बताए गए हैं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, तय सर्जरी टालने और स्थिर मरीजों को डिस्चार्ज कर अतिरिक्त क्षमता बनाने के कदम भी उठाए गए हैं।
यानी 27 सितंबर के प्रदर्शन को लेकर प्रशासन सिर्फ सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था नहीं कर रहा, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को भी संभावित आपात स्थिति के लिए तैयार किया जा रहा है। हालांकि, इन अस्पताल तैयारियों का मतलब यह नहीं है कि बड़े पैमाने पर हिंसा निश्चित रूप से होगी। उपलब्ध रिपोर्टों में इन्हें संभावित आपात स्थिति से निपटने की तैयारी के तौर पर बताया गया है।
इसी बीच इमरान खान के परिवार पर भी कार्रवाई की खबर सामने आई है। उनकी बहन अलीमा खान को 20 सितंबर को लाहौर में पंजाब के Maintenance of Public Order यानी MPO कानून के तहत 30 दिनों के लिए हिरासत में लिया गया। इसके बाद PTI ने उनकी दो अन्य बहनों डॉ. उजमा खान और नोरीन नियाजी के हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी।
डॉन और अन्य रिपोर्टों के मुताबिक, अलीमा खान के खिलाफ जारी आदेश में 30 दिनों की हिरासत का प्रावधान किया गया था। उनकी हिरासत को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख भी किया गया है। 23 सितंबर को लाहौर हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी अलीमा खान, उजमा खान और नोरीन नियाजी की हिरासत तथा PTI कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियों पर चिंता जताई है। संगठन के मुताबिक, परिवार के कुछ अन्य सदस्यों को भी हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़े जाने की जानकारी है।
PTI का आरोप है कि 27 सितंबर के मार्च से पहले उसके नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की जा रही है। पार्टी की ओर से कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत का दावा किया गया है। हालांकि, अलग-अलग गिरफ्तारियों और पार्टी द्वारा बताए गए आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हुई है।
सरकार की तरफ से भी प्रदर्शन को लेकर सख्त रुख सामने आया है। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा है कि सरकार 27 सितंबर को मार्च को रोकने के लिए कदम उठाएगी। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने भी आदेश दिया है कि राजनीतिक गतिविधि के लिए सरकारी संसाधनों या आधिकारिक मशीनरी का इस्तेमाल नहीं किया जाए।
27 सितंबर के मार्च को देखते हुए सुरक्षा तैयारियां सिर्फ इस्लामाबाद तक सीमित नहीं हैं। पंजाब सरकार ने रावलपिंडी, अटक, झेलम और मियांवाली में 22 सितंबर से 5 अक्टूबर तक रेंजर्स की तैनाती की मांग की है। इन इलाकों को इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इस्लामाबाद की ओर जाने वाले प्रदर्शनकारियों की आवाजाही यहां से प्रभावित हो सकती है।
इस बीच PTI ने भी अपना मार्च जारी रखने की बात कही है। पार्टी का कहना है कि उसका प्रदर्शन इमरान खान की रिहाई और संविधान की सर्वोच्चता की मांग को लेकर है। सरकार इसे नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक कदम उठा रही है।
अब 27 सितंबर पाकिस्तान की राजनीति के लिए एक अहम तारीख बन गई है। एक तरफ PTI बड़े प्रदर्शन की तैयारी में है, दूसरी तरफ सरकार राजधानी की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को संभावित आपात स्थिति के लिए तैयार कर रही है। अस्पतालों में अतिरिक्त क्षमता तैयार करने, मेडिकल स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने और सुरक्षा बलों की तैनाती से साफ है कि प्रशासन किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने की तैयारी में है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि 27 सितंबर को इस्लामाबाद में प्रदर्शन किस रूप में सामने आता है। क्या सरकार और PTI के बीच टकराव टल पाएगा? क्या प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा? और क्या अस्पतालों को की गई आपात तैयारियों की जरूरत पड़ेगी? इन सवालों के जवाब 27 सितंबर के घटनाक्रम से ही सामने आएंगे।
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