अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम
Published by: Adarsh Jha
Updated Mon, 29 Jun 2026 08:34 PM IST
Link Copied
बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर शेख हसीना के नाम पर सिमटती नजर आ रही है। पूर्व प्रधानमंत्री ने दावा किया है कि वह इसी साल बांग्लादेश लौटेंगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या मौत की सजा, आवामी लीग पर प्रतिबंध, चुनाव लड़ने पर रोक और हजारों समर्थकों पर कार्रवाई के बीच उनकी वापसी संभव है? क्या यह एक और राजनीतिक संघर्ष की शुरुआत है या फिर सत्ता में लौटने की नई रणनीति? देखिए हमारी यह खास रिपोर्ट।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहली बार खुलकर कहा है कि वह इसी साल अपने देश लौटेंगी। भारत में रह रहीं हसीना ने एक इंटरव्यू में कहा कि वह हर बाधा और हर साजिश को पार करते हुए बांग्लादेश वापस जाएंगी। उनका कहना है कि उनका मकसद सिर्फ सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि लोकतंत्र, कानून का राज और 1971 के मुक्ति संग्राम की भावना को फिर से स्थापित करना है।
लेकिन हकीकत यह है कि हसीना की राह बेहद मुश्किल दिखाई देती है। 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामलों में उन्हें अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है। उन पर आंदोलन के दौरान हिंसा रोकने में विफल रहने, हत्या के लिए उकसाने और कथित तौर पर कार्रवाई के आदेश देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में भी आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौत का जिक्र किया गया था। हालांकि शेख हसीना इन सभी आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए पूरी तरह खारिज करती हैं।
केवल शेख हसीना ही नहीं, उनकी पार्टी आवामी लीग भी अभूतपूर्व संकट से गुजर रही है। जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन और सरकार गिरने के बाद अंतरिम सरकार ने पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगा दी। बाद में आतंकवाद निरोधक कानून में संशोधन कर इस प्रतिबंध को कानूनी आधार दिया गया। चुनाव आयोग ने पार्टी का पंजीकरण भी रद्द कर दिया। नतीजा यह हुआ कि पार्टी चुनावी राजनीति से लगभग बाहर हो गई और उसके नेताओं के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई जारी है।
इसके बावजूद आवामी लीग अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी का दावा है कि वह पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होकर वापसी करेगी। स्थापना दिवस पर प्रतिबंध के बावजूद शक्ति प्रदर्शन की कोशिश की गई, जिसके बाद ढाका समेत कई इलाकों में तनाव पैदा हो गया। पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया और बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती की गई। सरकार का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी तरह की हिंसा रोकने के लिए यह कदम उठाया गया।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक शेख हसीना फिलहाल भारत में रहकर लगातार अपनी पार्टी के नेताओं के संपर्क में हैं। बताया जा रहा है कि वह रोजाना कई घंटों तक पार्टी नेताओं और पूर्व मंत्रियों के साथ बैठकें करती हैं और फोन के जरिए संगठन की गतिविधियों पर नजर रखती हैं। पार्टी नेताओं का दावा है कि हसीना राजनीतिक संघर्ष की नई रणनीति तैयार कर रही हैं और सही समय आने पर बांग्लादेश लौटेंगी।
हालांकि उनकी वापसी का रास्ता सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी कठिन है। बांग्लादेश की मौजूदा सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा नहीं बल्कि कथित अपराधों के लिए जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया है। दूसरी ओर आवामी लीग का आरोप है कि न्यायपालिका और सरकारी संस्थाओं का इस्तेमाल उन्हें राजनीति से खत्म करने के लिए किया जा रहा है। दिलचस्प बात यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पूरे राजनीतिक दल पर प्रतिबंध लगाने को लेकर सवाल उठे हैं और इसे लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए चुनौती बताया गया है।
शेख हसीना के राजनीतिक जीवन में यह पहला संकट नहीं है। 1975 में उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद उन्हें वर्षों निर्वासन में रहना पड़ा था। 1981 में उन्होंने बांग्लादेश लौटकर लोकतंत्र बहाली का आंदोलन शुरू किया और बाद में प्रधानमंत्री बनीं। 2007 में भी उन्हें भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाना पड़ा, लेकिन रिहाई के बाद उन्होंने चुनाव लड़ा और सत्ता में वापसी की। यही वजह है कि उनके समर्थकों को भरोसा है कि इस बार भी वह वापसी का रास्ता निकाल लेंगी।
फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। एक तरफ मौत की सजा, कानूनी मुकदमे, पार्टी पर प्रतिबंध और राजनीतिक अलगाव है, तो दूसरी तरफ शेख हसीना का दावा है कि वह हर हाल में बांग्लादेश लौटेंगी। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बांग्लादेश की राजनीति एक बार फिर शेख हसीना की वापसी की गवाह बनेगी, या फिर मौजूदा कानूनी और राजनीतिक हालात उनकी राह हमेशा के लिए रोक देंगे? इसका जवाब आने वाले महीनों में बांग्लादेश की राजनीति तय करेगी।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम वीडियो सिर्फ सब्सक्राइबर्स के लिए उपलब्ध है
प्रीमियम वीडियो
सभी विशेष आलेख
फ्री इ-पेपर
सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।