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Crude oil prices have plummeted, and expectations of the Fed raising interest rates have also vanished!
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कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट, फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदें भी खत्म!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम
Published by: Bhaskar Tiwari
Updated Wed, 23 Sep 2026 02:30 AM IST
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कच्चे तेल की कीमतों में मंगलवार को तेज गिरावट देखने को मिली और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें 98 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गईं। हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ इसमें कुछ सुधार भी दर्ज किया गया। बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की प्रमुख वजह अमेरिका और ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक प्रगति की खबरों को माना जा रहा है। अगर दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार होता है, तो पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और उससे जुड़े जोखिम कम हो सकते हैं। ऐसे में तेल की आपूर्ति को लेकर बाजार की चिंताएं घटने की संभावना है, जिसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है। इसके अलावा सऊदी अरब से तेल निर्यात बढ़ने की खबरों ने भी कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी विशेषज्ञ मानव मोदी के मुताबिक, पिछले चार कारोबारी सत्रों में तेल की कीमतों में 9 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है। उन्होंने इसके पीछे सऊदी अरब से बढ़ते तेल निर्यात और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित कूटनीतिक प्रगति को प्रमुख कारण बताया। तेल की कीमतों में यह नरमी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि ऊर्जा की कीमतें महंगाई पर सीधा असर डालती हैं। जब कच्चा तेल महंगा होता है, तो पेट्रोल-डीजल, परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ने के कारण महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इसके उलट तेल की कीमतों में लगातार गिरावट रहने पर ऊर्जा से जुड़ी महंगाई कुछ कम हो सकती है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के संदर्भ में भी तेल की कीमतों का यह रुझान महत्वपूर्ण है। महंगाई को नियंत्रित करने के लिए फेड ने हाल में ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद दरें 3.75 प्रतिशत से 4.00 प्रतिशत के दायरे में पहुंच गई थीं। नीति-निर्माताओं ने महंगाई के लक्ष्य से ऊपर बने रहने का हवाला देते हुए आगे भी सख्त मौद्रिक नीति की जरूरत की संभावना जताई थी। हालांकि, ऊर्जा कीमतों में लगातार नरमी बनी रहती है तो महंगाई पर अतिरिक्त दबाव कम हो सकता है। इससे भविष्य में ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाएं भी बदल सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों की दिशा कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें अमेरिका-ईरान कूटनीतिक बातचीत की प्रगति, सऊदी अरब और अन्य प्रमुख उत्पादकों का उत्पादन एवं निर्यात, वैश्विक मांग और अमेरिका की मौद्रिक नीति प्रमुख हैं। यदि तेल की कीमतों में गिरावट का मौजूदा रुझान जारी रहता है, तो ऊर्जा लागत से मिलने वाली महंगाई की चुनौती कुछ कम हो सकती है। हालांकि, फेड के अगले फैसले केवल तेल की कीमतों पर नहीं, बल्कि महंगाई, रोजगार और व्यापक आर्थिक आंकड़ों सहित कई संकेतकों पर निर्भर करेंगे।
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