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सरकार में अफसरशाही से नाराज थे हरक सिंह

Sat, 19 Mar 2016 02:16 AM IST
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून
बिशन सिंह बोरा/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 19 Mar 2016 02:16 AM IST
सार

  • लिखित में कर चुके थे शिकायत।
  • उपनल कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं होने से भी थे नाराज।
  • हरीश रावत को पत्र लिखकर की थी शिकायत।

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why harak singh angry for government.
हरक सिंह रावत - फोटो : file photo

विस्तार

कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत कांग्रेस सरकार में अफसरशाही से नाराज थे। कृषि विभाग में काम पर वे अपनी असमर्थता भी जता चुके थे। मुख्यमंत्री हरीश रावत को वे लिखित में शिकायत कर चुके थे कि अफसर उनके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। वहीं, पौड़ी की जिला पंचायत अध्यक्षा एवं शिक्षिका पत्नी का दून से पौड़ी तबादला एवं उपनल कर्मचारियों का नियमितीकरण नहीं होने से भी वे नाराज थे।

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कृषि मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत पिछले डेढ़ साल से हरीश रावत की सरकार से नाराज चल रहे थे। डेढ़ साल पहले उनकी नाराजगी तब खुलकर सामने आई जब विभाग के बर्खास्त कर्मचारी के मामले में विभागीय अधिकारियों ने हरक सिंह की जानकारी के बगैर ट्रिब्यूनल के फैसले पर हाईकोर्ट में अपील की।
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इससे नाराज हरक ने 14 अगस्त 2014 को मुख्यमंत्री हरीश रावत को पत्र लिखकर कहा कि वे कृषि विभाग में कोई काम करने में असमर्थ हैं। शासन में अफसरों से नाराज कृषि मंत्री यही नहीं रुके। उन्होंने कहा कि उन्हें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कार्यपालिका और विधायिका में काम का लंबा अनुभव है। अफसर गंभीर प्रकरणों में पत्रावली उनके संज्ञान में लाए बगैर ही अपील योजित कर रहे हैं।

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सीएम को फाइल पर देना पड़ा था निर्देश

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हरक सिंह रावत - फोटो : RajivGupta/AmarUjala

हरक सिंह रावत का कहना था कि अफसरों की मनमानी से सरकार कमजोर दिखे, ऐसा नहीं होना चाहिए। 28 अगस्त 2014 को इस प्रकरण की फाइल मुख्यमंत्री हरीश रावत के पास पहुंची तो उन्होंने फाइल पर अपनी टिप्पणी में कहा कि कृषि मंत्री को समस्त स्थिति से अवगत कराएं। जबकि अधिकारियों को यह प्रक्रिया पहले ही अपना लेनी चाहिए थी। 

यह भी थी हरक की नाराजगी की वजह
जिला पंचायत की अध्यक्षा एवं शिक्षिका दीप्ति रावत के दून से पौड़ी तबादला नहीं होने, उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले, उद्यान विभाग का ढांचा, कृषि विभाग में अधिकारियों के पद सृजित करने, ढैचा बीज प्रकरण का निस्तारण नहीं होने से भी वे खफा थे। छोटे-छोटे काम के लिए उनके बजाए सीधे फाइल मुख्यमंत्री के पास अनुमोदन के लिए जाने और मामलों के लटकने से वे नाराज थे।

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