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भूकंप के झटकों से हिमालयी क्षेत्र के जलस्रोतों में हुआ बदलाव

Mon, 04 Apr 2016 10:33 AM IST
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 04 Apr 2016 10:33 AM IST
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water resources in the Himalayan region
हिमालय क्षेत्र में जल संसाधन

हिमालयी क्षेत्र के जलस्रोतों के रास्ते बदल गए हैं। इस वजह से कई जगह जलस्रोत सूख गए हैं। अधिकांश जलस्रोतों में 70 से 90 फीसदी तक पानी कम हो गया है।

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वैज्ञानिक इसका कारण जलवायु परिवर्तन और बीच-बीच में आ रहे भूकंप के झटकों को बता रहे हैं। वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान इसे पहले ही बता चुका है और अब उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के सर्वेक्षण में इसकी पुष्टि हो रही है। गर्मी में पेयजल संकट की स्थिति और विकराल हो सकती है।
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उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र ने प्रदेश में जलस्रोतों की मैपिंग का कार्य शुरू किया है। इसी सर्वेक्षण में कालसी के सदिया, विजाऊ, सकरौल, जड़ाऊ आदि क्षेत्रों के जलस्रोतों में 90 फीसदी तक पानी कम हो गया है। इससे वैज्ञानिक हैरत में हैं।
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इसी तरह अन्य क्षेत्रों से भी जलस्रोतों के सूखने और पानी कम होने की शिकायतें आ रही हैं। शासन में बताए गए आंकड़ों को देखें तो जलस्रोत सूखने से तकरीबन 350 छोटी-बड़ी पेयजल परियोजनाएं बंद हो गई हैं। पेयजल किल्लत की यह स्थिति तो शुरुआती जांच में उजागर हुई है, लेकिन स्थिति और विकराल हो सकती है।

विज्ञानियों ने पहले ही दी थी जलस्त्रोतों में कम पानी होने की खबर

water resources in the Himalayan region
जल संसाधन

वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान के विज्ञानियों की टीम ने जलस्रोतों में पानी कम होने की खबर पहले ही दे दी थी। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से जलस्रोत रिचार्ज नहीं हो पा रहे। इसके अलावा जब भूकंप के झटके लगते हैं तो पानी का रास्ता बंद हो जाता है।

कई रास्ते खुल भी जाते हैं, लेकिन कहां से पानी निकलेगा यह तय नहीं होता। जलस्रोतों पर कार्य कर रहीं यूसैक की वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. आशा थपलियाल का कहना है कि कालसी के जलस्रोतों में 70 से 90 फीसदी तक पानी की कमी पाई गई है। 

भूकंप के झटकों से जलस्रोत कभी बंद हो जाते हैं और कभी कई रास्तों को जुड़ जाने से पानी अधिक हो जाता है, लेकिन दो-तीन महीने में फिर सामान्य हो जाता है। जलवायु परिवर्तन के असर से झरनों में पानी कम हो रहा है। सर्वेक्षण में इसकी पुष्टि हुई थी।
- डा. एसके बरतरिया, वरिष्ठ विज्ञानी वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान

जलस्रोत सूखना एक बड़ी समस्या है। इससे पेयजल परियोजनाएं बंद हो जाती हैं। फिर नए सिरे से जलस्रोत तलाशने पड़ते हैं।
- एस. राजू, अपर मुख्य सचिव

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