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सिक्योर हिमालय परियोजना में स्वावलंबी बनेंगे युवा
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गोविंद वन्य जीव विहार एवं पार्क क्षेत्र के युवा अब सिक्योर हिमालय परियोजना के जरिये स्वावलंबी बनेंगे। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी सिक्योर हिमालय परियोजना के तहत पार्क क्षेत्र के दस गांव से दस युवाओं का चयन किया गया है, जिन्हें एफआरआई देहरादून में एक माह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जो प्रशिक्षण के बाद ईको टूरिज्म, जड़ी बूटी व फलोत्पादन को बढ़ावा देंगे।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में सिक्योर हिमालय परियोजना की शुरुआत की थी। उत्तराखंड के गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान से लेकर अस्कोट अभयारण्य तक के क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है। गोविंद वन्य जीव विहार एवं पार्क क्षेत्र के सट्टा, गंगाड़, ओसला, सौड़, पुजेली, खन्यासणी, दोणी, ढाटमीर, लिवाड़ी, फिताड़ी गांव में सिक्योर हिमालय परियोजना संचालित की जा रही है। पार्क प्रशासन ने परियोजना के तहत गांवों से 10 युवाओं का चयन प्रशिक्षण के लिए किया है। विभाग के उप निदेशक देवी प्रसाद बलूनी ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाना है। संरक्षित क्षेत्र से लगे गांव में ईको टूरिज्म, जड़ी बूटी और फलोत्पादन का विकास होगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के युवाओं को अपनी संस्कृति, जैव विविधता, समृद्ध वन्य जीव संसार, नैसर्गिक सौंदर्य से रूबरू होने का मौका भी मिलेगा।
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केंद्र सरकार ने वर्ष 2017 में सिक्योर हिमालय परियोजना की शुरुआत की थी। उत्तराखंड के गंगोत्री राष्ट्रीय उद्यान से लेकर अस्कोट अभयारण्य तक के क्षेत्र को इसमें शामिल किया गया है। गोविंद वन्य जीव विहार एवं पार्क क्षेत्र के सट्टा, गंगाड़, ओसला, सौड़, पुजेली, खन्यासणी, दोणी, ढाटमीर, लिवाड़ी, फिताड़ी गांव में सिक्योर हिमालय परियोजना संचालित की जा रही है। पार्क प्रशासन ने परियोजना के तहत गांवों से 10 युवाओं का चयन प्रशिक्षण के लिए किया है। विभाग के उप निदेशक देवी प्रसाद बलूनी ने बताया कि परियोजना का उद्देश्य ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाना है। संरक्षित क्षेत्र से लगे गांव में ईको टूरिज्म, जड़ी बूटी और फलोत्पादन का विकास होगा। उन्होंने बताया कि क्षेत्र के युवाओं को अपनी संस्कृति, जैव विविधता, समृद्ध वन्य जीव संसार, नैसर्गिक सौंदर्य से रूबरू होने का मौका भी मिलेगा।
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