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अस्पताल में जिंदगी-मौत के बीच संघर्ष कर रहा विनय
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वन आरक्षी भर्ती की 25 किमी की दौड़ के दौरान हालात बिगड़ने से अस्पताल में भर्ती विनय मटूड़ा जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहा है। विनय के पिता विजेंद्र सिंह ने सीएम को पत्र लिखकर बेटे के इलाज के लिए आर्थिक मदद देने और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएससी) की ओर से 27 जुलाई को देहरादून में वन आरक्षी भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें पीपलमंडी चिन्यालीसौड़ निवासी विनय मटूड़ा भी शामिल हुआ। 25 किमी दौड़ के दौरान विनय बेहोश हो गया, जिसे उसके साथियों ने कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में हालत बिगड़ने पर इंद्रेश हॉस्पिटल और बाद में मैक्स में भर्ती कराया गया। जहां विनय की हालत नाजुक बनी हुई है। विनय के पिता विजेंद्र सिंह का आरोप है कि आयोग के अफसरों ने 25 किमी दौड़ के दौरान पीने के पानी व ग्लूकोज की व्यवस्था नहीं की, जिससे उनके बेटे की दोनों किडनियां एवं लीवर प्रभावित हुए हैं। प्रत्येक दिन डाइलिसिस हो रहा है। उन्होंने जुलाई के महीने में एक बजे दोपहर को 25 किमी की दौड़ कराने पर भी सवाल उठाए। कहा कि यह अव्यवहारिक और अभ्यर्थियों को जानबूझकर मौत के मुंह में धकेला गया है। उन्होंने घटना के बाद से आयोग के किसी भी जिम्मेदार अफसर के पीड़ित अभ्यर्थी का हालचाल जानने नहीं पहुंचने पर रोष जताया। बता दें कि दौड़ के बाद चमोली निवासी एक अभ्यर्थी की हालत बिगड़ने से मौत हो चुकी है।
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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएससी) की ओर से 27 जुलाई को देहरादून में वन आरक्षी भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें पीपलमंडी चिन्यालीसौड़ निवासी विनय मटूड़ा भी शामिल हुआ। 25 किमी दौड़ के दौरान विनय बेहोश हो गया, जिसे उसके साथियों ने कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में हालत बिगड़ने पर इंद्रेश हॉस्पिटल और बाद में मैक्स में भर्ती कराया गया। जहां विनय की हालत नाजुक बनी हुई है। विनय के पिता विजेंद्र सिंह का आरोप है कि आयोग के अफसरों ने 25 किमी दौड़ के दौरान पीने के पानी व ग्लूकोज की व्यवस्था नहीं की, जिससे उनके बेटे की दोनों किडनियां एवं लीवर प्रभावित हुए हैं। प्रत्येक दिन डाइलिसिस हो रहा है। उन्होंने जुलाई के महीने में एक बजे दोपहर को 25 किमी की दौड़ कराने पर भी सवाल उठाए। कहा कि यह अव्यवहारिक और अभ्यर्थियों को जानबूझकर मौत के मुंह में धकेला गया है। उन्होंने घटना के बाद से आयोग के किसी भी जिम्मेदार अफसर के पीड़ित अभ्यर्थी का हालचाल जानने नहीं पहुंचने पर रोष जताया। बता दें कि दौड़ के बाद चमोली निवासी एक अभ्यर्थी की हालत बिगड़ने से मौत हो चुकी है।
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