फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   Two convicts sentenced to 10 years in rape

दुष्कर्म में दो दोषियों को 10-10 साल की सजा

Tue, 20 Jul 2021 09:36 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Tue, 20 Jul 2021 09:36 PM IST
विज्ञापन
Two convicts sentenced to 10 years in rape
विशेष सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर शर्मा की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी दो अभियुक्तों को 10-10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोनों अभियुक्तों पर अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड का भुगतान करने पर अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, तीसरे अभियुक्त को दोष मुक्त किया गया है। विशेष सत्र न्यायाधीश ने पीड़िता को प्रतिकर के रूप में 15 हजार देने के आदेश दिए हैं।
विज्ञापन

घटना 21 जनवरी 2019 की है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता पूनम सिंह ने बताया कि 29 जनवरी 2019 को मोरी थाने में नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप मे मुकदमा दर्ज किया गया था। पीड़िता के पिता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि गांव के ही तीन युवकों रविंद्र लाल, जगमोहन व मनीष उसकी नाबालिग बेटी को घर से उठा ले गए थे। 21 जनवरी से 5 फरवरी तक रविंद्र लाल ने बेटी को जगमोहन के ससुराल हिमाचल में रखा। इस दौरान रविंद्र लाल ने उसके साथ कई बार जबरन संबंध बनाए। 5 फरवरी 2019 को पुलिस ने पीड़िता को रविंद्र लाल के साथ हिमाचल से बरामद किया था। सहायक शासकीय अधिवक्ता पूनम ने बताया कि पुलिस ने 18 जुलाई 2019 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
विज्ञापन

विशेष सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर शुक्ला ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद मंगलवार को फैसला सुनाया। अभियुक्त रविंद्र लाल को अपहरण का दोषी पाते हुए तीन वर्ष का सश्रम कारावास व पांच हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थ दंड न भुगतने पर एक माह की सजा और भुगतनी होगी। इसके अलावा पोक्सो के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड न भुगतने पर दो माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। दूसरे अभियुक्त जगमोहन को अपहरण का आरोपी पाते हुए तीन वर्ष के सश्रम कारावास व पांच हजार के अर्थ दंड से दंडित किया गया। अर्थदंड न भुगतने पर एक माह का सश्रम कारावास अतिरिक्त भुगतना होगा। जगमोहन को पोक्सो एक्ट के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास व 10 हजार के अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। अर्थदंड न भुगतने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। अर्थदंड अदा न करने की एवज में दी गई सजा को छोड़ कर सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। वहीं तीसरे अभियुक्त मनीष को दोष मुक्त कर दिया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed