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आपदा के तीन साल बाद भी आठ गांव अलग-थलग
ब्यूरो/अमर उजाला उत्तरकाशी
Updated Sun, 19 Jun 2016 10:07 PM IST
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आपदा के तीन साल बाद भी सरकार धारमंडल क्षेत्र के आठ गांवों के ग्रामीणों की आवाजाही सुगम नहीं कर पाई है। बाढ़ में बही नगाणगांव मोटर पुल की एप्रोच पीएमजीएसवाई की ओर से करीब सवा करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी दुरुस्त नहीं हो पाई।
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बाढ़ में बहे खरादी झूला पुल का तो अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है। इस हाल में आठ गांवों के ग्रामीण आपदा के तीन साल बाद भी ट्राली के सहारे जोखिम भरी आवाजाही करने को मजबूर हैं।
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अगस्त 2012 और जून 2013 की आपदा में यमुनोत्री हाईवे से लगे खरादी कस्बे में भारी तबाही हुई थी। जून की आपदा में खरादी में बना धारमंडल क्षेत्र के स्यालब, सुकण, गौल, फूलधार, किसाला, थान एवं नगाणगांव को जोड़ने वाला पैदल झूला पुल बह गया था।
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साथ ही नगाणगांव सड़क पर बने मोटर पुल की एप्रोच भी ढह गई थी, जिससे धारमंडल और ठकराल पट्टी के 13 गांवों की आवाजाही ठप हो गई थी। आपदा के बाद पीएमजीएसवाई ने एप्रोच रोड दुरुस्त करने के नाम पर 1.15 करोड़ रुपये खर्च तो किए, लेकिन यह एप्रोच अब भी यमुना के कटाव की जद में आकर क्षतिग्रस्त हो रही है।
खरादी में बहे झूला पुल के स्थान पर सरकार ने एक ट्राली लटका कर इतिश्री कर ली। ट्राली से आवाजाही के दौरान ट्राली की घिरनी में उंगली फंसने से कई ग्रामीण घायल हो चुके हैं। आपदा के चार साल बाद भी हालात में सुधार नहीं होने से क्षेत्र की जनता खिन्न है और उनमें सरकार के प्रति खासा रोष है।
भाजपा मंडल अध्यक्ष दर्मियान सिंह चौहान, प्रदीप चौहान, रणवीर रावत, जितेंद्र, विनोद चौहान आदि ने सरकार से शीघ्र मोटर पुल की एप्रोच दुरुस्त कराने तथा झूला पुल का निर्माण कराने की मांग की है।