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बदइंतजामी का शिकार हुई सवा दो मेगावाट की पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना
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उत्तरकाशी में बदइंतजामी का शिकार हुई पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना।
- फोटो : UTTER KASHI
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एक ओर सरकार बंद जल विद्युत परियोजनाओं को दोबारा चालू कराने की पैरवी कर रही है, वहीं दूसरी ओर जिले की लघु जल विद्युत परियोजनाएं बदइंतजामी के चलते ठप पड़ती जा रही हैं। सवा दो मेगावाट की पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना पर निर्माण लागत से ज्यादा मरम्मत पर खर्च और उत्पादन में हानि के बावजूद लघु जल विद्युत निगम प्रबंधन इसे सुचारु नहीं कर पाया है। बीते साल ही चालू हुई इस परियोजना में एक जुलाई से फिर विद्युत उत्पादन ठप पड़ा है।
अप्रैल 2004 में 8.83 करोड़ रुपये लागत से बनी पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना निर्माण के शुरूआती वर्षों में करीब 12 मिलियन यूनिट सालाना उत्पादन दे रही थी। आपदा में इस परियोजना का हेड और पावर चैनल क्षतिग्रस्त होने से उत्पादन ठप हो गया था। लघु जल विद्युत निगम ने इसकी मरम्मत पर 12 करोड़ रुपये से अधिक बजट खर्च कर जनवरी 2018 में उत्पादन बहाल तो किया, लेकिन अभी तक न तो इसके हेड का काम पूरा हुआ है और न ही डिसिल्टिंग चैंबर ठीक ढंग से काम कर पा रहे हैं। यही कारण है कि बीते डेढ़ साल से यह परियोजना क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं कर पा रही है। अब परियोजना के इंजीनियरों ने पिलंगगाड़ के पानी में सिल्ट आने का बहाना बनाकर बीते 1 जुलाई से विद्युतगृह बंद कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार विद्युतगृह में एक टरबाइन की मरम्मत का काम चल रहा है और दूसरी भी ढंग से काम नहीं कर पा रही है।
कोट...........
यह सही है कि बंगलूरू की अलग-अलग कंपनियों से टरबाइनों के कलपुर्जे मंगाए गए हैं और उन्हीं कंपनियों से मरम्मत का काम लिया जा रहा है। एक टरबाइन की मरम्मत के लिए बंगलूरू से तकनीशियनों के आने का इंतजार है। जबकि सिल्ट आने के कारण दूसरी टरबाइन को भी बंद करना पड़ा है।
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अजय सिंह, उपमहाप्रबंधक लघु जल विद्युत निगम।
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अप्रैल 2004 में 8.83 करोड़ रुपये लागत से बनी पिलंगगाड़ लघु जल विद्युत परियोजना निर्माण के शुरूआती वर्षों में करीब 12 मिलियन यूनिट सालाना उत्पादन दे रही थी। आपदा में इस परियोजना का हेड और पावर चैनल क्षतिग्रस्त होने से उत्पादन ठप हो गया था। लघु जल विद्युत निगम ने इसकी मरम्मत पर 12 करोड़ रुपये से अधिक बजट खर्च कर जनवरी 2018 में उत्पादन बहाल तो किया, लेकिन अभी तक न तो इसके हेड का काम पूरा हुआ है और न ही डिसिल्टिंग चैंबर ठीक ढंग से काम कर पा रहे हैं। यही कारण है कि बीते डेढ़ साल से यह परियोजना क्षमता के अनुरूप उत्पादन नहीं कर पा रही है। अब परियोजना के इंजीनियरों ने पिलंगगाड़ के पानी में सिल्ट आने का बहाना बनाकर बीते 1 जुलाई से विद्युतगृह बंद कर दिया है।
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सूत्रों के अनुसार विद्युतगृह में एक टरबाइन की मरम्मत का काम चल रहा है और दूसरी भी ढंग से काम नहीं कर पा रही है।
कोट...........
यह सही है कि बंगलूरू की अलग-अलग कंपनियों से टरबाइनों के कलपुर्जे मंगाए गए हैं और उन्हीं कंपनियों से मरम्मत का काम लिया जा रहा है। एक टरबाइन की मरम्मत के लिए बंगलूरू से तकनीशियनों के आने का इंतजार है। जबकि सिल्ट आने के कारण दूसरी टरबाइन को भी बंद करना पड़ा है।
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अजय सिंह, उपमहाप्रबंधक लघु जल विद्युत निगम।