{"_id":"6a44fadc4006385eab0f4b02","slug":"neri-village-which-gave-up-land-for-the-sake-of-development-is-deprived-of-amenities-uttarkashi-news-c-54-1-uki1010-120847-2026-07-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarkashi News: विकास के नाम पर जमीन देने वाला नेरी गांव सुविधाओं से वंचित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarkashi News: विकास के नाम पर जमीन देने वाला नेरी गांव सुविधाओं से वंचित
Wed, 01 Jul 2026 05:02 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Wed, 01 Jul 2026 05:02 PM IST
विज्ञापन
चिन्यालीसौड़। विकासखंड के नेरी गांव की पहचान और अधिकारों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने धरासू पावर हाउस का नाम नेरी रखने के साथ ही उससे मिलने वाली सुविधाएं मुहैया कराने की मांग की।
ग्रामीण हरीश थपलियाल ने बताया कि धरासू परियोजना के निर्माण के लिए नेरी गांव के ग्रामीणों ने लगभग 800 नाली भूमि दी थी। राजस्व अभिलेखों में आज भी यह भूमि नेरी ग्राम पंचायत के नाम दर्ज है लेकिन परियोजना का नाम धरासू पावर हाउस रख दिया गया। उनका कहना है कि इससे नेरी गांव का ऐतिहासिक और भौगोलिक अस्तित्व धीरे-धीरे धूमिल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल पावर हाउस ही नहीं बल्कि नेरी गांव की सीमा के भीतर संचालित पॉलिटेक्निक संस्थान, आईटीआई, गैस गोदाम और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में भी गांव के नाम का कहीं उल्लेख नहीं है। संवाद
इससे ग्रामीण स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि उनके त्याग और योगदान को जानबूझकर भुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि देने के बावजूद नेरी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव में सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार और अन्य आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
उनका कहना है कि जिस गांव ने क्षेत्रीय विकास की नींव रखने के लिए अपनी जमीन दी। उसी गांव को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीणों के सहयोग से उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल में जनहित याचिका दायर कर न्यायिक लड़ाई लड़ी जाएगी।
विज्ञापन
ग्रामीण हरीश थपलियाल ने बताया कि धरासू परियोजना के निर्माण के लिए नेरी गांव के ग्रामीणों ने लगभग 800 नाली भूमि दी थी। राजस्व अभिलेखों में आज भी यह भूमि नेरी ग्राम पंचायत के नाम दर्ज है लेकिन परियोजना का नाम धरासू पावर हाउस रख दिया गया। उनका कहना है कि इससे नेरी गांव का ऐतिहासिक और भौगोलिक अस्तित्व धीरे-धीरे धूमिल होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि केवल पावर हाउस ही नहीं बल्कि नेरी गांव की सीमा के भीतर संचालित पॉलिटेक्निक संस्थान, आईटीआई, गैस गोदाम और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों में भी गांव के नाम का कहीं उल्लेख नहीं है। संवाद
विज्ञापन
इससे ग्रामीण स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि उनके त्याग और योगदान को जानबूझकर भुलाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि देने के बावजूद नेरी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। गांव में सड़क, स्वास्थ्य, पेयजल, रोजगार और अन्य आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है।
विज्ञापन
उनका कहना है कि जिस गांव ने क्षेत्रीय विकास की नींव रखने के लिए अपनी जमीन दी। उसी गांव को विकास की मुख्यधारा से दूर रखा गया है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इस संबंध में सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो ग्रामीणों के सहयोग से उत्तराखंड उच्च न्यायालय, नैनीताल में जनहित याचिका दायर कर न्यायिक लड़ाई लड़ी जाएगी।