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नए सिरे से शुरू हुई जिला पंचायत उत्तरकाशी में घोटाले की जांच
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जिला पंचायत में धरातल पर कार्य कराए बगैर करोड़ों रुपये के गबन का मामला ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिन पहले हाईकोर्ट में पूर्व में बैठाई गई जांच वापस लेने का हलफनामा देने के साथ ही सरकार ने इस मामले की पंचायती राज विभाग के माध्यम से जांच शुरू करा दी है। पंचायती राज सचिव के आदेश पर डीएम उत्तरकाशी ने नए सिरे से इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
कुछ जिला पंचायत सदस्यों ने बीते नवंबर माह में मुख्यमंत्री से जिला पंचायत उत्तरकाशी में करोड़ों रुपये के घोटाले की शिकायत की थी। सीएम के आदेश पर गढ़वाल कमिश्नर ने डीएम उत्तरकाशी से इस मामले की जांच कराई। जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी ही गई थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने इस जांच को ही हाईकोर्ट में चुनौती दे डाली। कोर्ट ने इस संबंध में सरकार से जवाब तलब किया तो दो दिन पहले सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कर पूर्व में बैठाई गई जांच वापस लेने की जानकारी दी गई। जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होने के बावजूद सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठ रहे थे। जानकारों के अनुसार जांच की प्रक्रिया में पंचायती राज एक्ट का उल्लंघन होने के कारण सरकार ने पूर्व की जांच वापस ली।
अब सरकार ने बाकायदा पंचायती राज एक्ट के तहत इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पंचायती राज सचिव हरि चंद्र सेमवाल ने कुछ जिला पंचायत सदस्यों द्वारा बाकायदा शपथ पत्र के साथ लगाए गए आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। उक्त आदेश पर डीएम मयूर दीक्षित ने एक बार फिर नए सिरे से मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र लिखकर वर्ष 2019-20 व 2020-21 में राज्य वित्त समेत विभिन्न मदों में कराए गए कार्यों एवं भुगतान आदि से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए हैं।
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जिला पंचायत सदस्य ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
उत्तरकाशी। जिला पंचायत में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगा रहे जिला पंचायत सदस्यों ने जांच को लेकर असमंजस की स्थिति पर नाराजगी जताई है। जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह पंवार ने डीएम को पत्र लिखकर इस मामले में दस दिन के भीतर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। जिला पंचायत सदस्य दलवीर चंद, आनंद राणा, पवन पंवार, अनीता रावत, सरिता चौहान, मीनू कुंवर, कुसुमबाला, अरुण रावत एवं हाकम सिंह रावत का कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। ब्यूरो
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कुछ जिला पंचायत सदस्यों ने बीते नवंबर माह में मुख्यमंत्री से जिला पंचायत उत्तरकाशी में करोड़ों रुपये के घोटाले की शिकायत की थी। सीएम के आदेश पर गढ़वाल कमिश्नर ने डीएम उत्तरकाशी से इस मामले की जांच कराई। जांच पूरी कर रिपोर्ट शासन को भेजी ही गई थी कि जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण ने इस जांच को ही हाईकोर्ट में चुनौती दे डाली। कोर्ट ने इस संबंध में सरकार से जवाब तलब किया तो दो दिन पहले सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कर पूर्व में बैठाई गई जांच वापस लेने की जानकारी दी गई। जांच के दौरान आरोपों की पुष्टि होने के बावजूद सरकार के इस निर्णय पर सवाल उठ रहे थे। जानकारों के अनुसार जांच की प्रक्रिया में पंचायती राज एक्ट का उल्लंघन होने के कारण सरकार ने पूर्व की जांच वापस ली।
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अब सरकार ने बाकायदा पंचायती राज एक्ट के तहत इस मामले की जांच के आदेश दिए हैं। पंचायती राज सचिव हरि चंद्र सेमवाल ने कुछ जिला पंचायत सदस्यों द्वारा बाकायदा शपथ पत्र के साथ लगाए गए आरोपों की जांच के आदेश दिए हैं। उक्त आदेश पर डीएम मयूर दीक्षित ने एक बार फिर नए सिरे से मामले की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को पत्र लिखकर वर्ष 2019-20 व 2020-21 में राज्य वित्त समेत विभिन्न मदों में कराए गए कार्यों एवं भुगतान आदि से संबंधित सभी दस्तावेज तलब किए हैं।
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जिला पंचायत सदस्य ने दी आमरण अनशन की चेतावनी
उत्तरकाशी। जिला पंचायत में करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप लगा रहे जिला पंचायत सदस्यों ने जांच को लेकर असमंजस की स्थिति पर नाराजगी जताई है। जिला पंचायत सदस्य चंदन सिंह पंवार ने डीएम को पत्र लिखकर इस मामले में दस दिन के भीतर निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर आमरण अनशन की चेतावनी दी है। जिला पंचायत सदस्य दलवीर चंद, आनंद राणा, पवन पंवार, अनीता रावत, सरिता चौहान, मीनू कुंवर, कुसुमबाला, अरुण रावत एवं हाकम सिंह रावत का कहना है कि यदि शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करेंगे। ब्यूरो