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भारी पड़ रहा हिमालय में जलवायु परिवर्तन, बर्फ विहीन हुए गंगोत्री ग्लेशियर के कई हिस्से
Mon, 14 Sep 2020 11:33 AM IST
देहरादून ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
Published by: देहरादून ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2020 11:33 AM IST
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gangotri glacier
- फोटो : File Photo
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हिमालय में जलवायु परिवर्तन का असर ही है कि गंगोत्री ग्लेशियर को पोषित करने वाले सैकड़ों छोटे-बड़े ग्लेशियरों के बड़े हिस्से बर्फ विहीन हो चुके हैं। इन्हें बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
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साहसिक पर्यटन के क्षेत्र में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित गंगोत्री हिमालय की जानकार डा. हर्षवंती बिष्ट ने कुछ वर्ष पूर्व चौखंबा हिमशिखर के आधार शिविर क्षेत्र के आसपास का अध्ययन किया था, जिसकी रिपोर्ट उन्होंने पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को दी थी।
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इसमें उनका कहना था कि गंगोत्री ग्लेशियर 15 फीट सालाना की दर से पीछे खिसक रहा है। इसे पोषित करने वाले मेरू, कीर्ति, घनोहिम, चतुरंगी, रक्तवर्ण आदि ग्लेशियरों के जंक्शन बर्फ विहीन होने से यहां खुले में पानी बह रहा है।
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पर्वतारोही चंद्रप्रभा ऐतवाल भी कहती हैं कि जूनिफर की झाड़ियों को पर्यटकों द्वारा जलाकर नष्ट करना तथा भोजवृक्षों की पहुंच गोमुख से आगे की ओर बढ़ना ग्लेशियर के लिए खतरे की घंटी है।
यहां वर्ष 2017 में गोमुख से करीब तीन किमी ऊपर नीलाताल से आए पानी और भारी मलबे से गंगोत्री ग्लेशियर के मुहाने गोमुख को काफी क्षति पहुंची। स्वामी सुंदरानंद का कहना है कि उन्होंने 65 साल में गंगोत्री ग्लेशियर को सवा तीन किमी पीछे खिसकते देखा है।