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गंगोत्री में साधनारत 46 साधु
Uttar Kashi
Updated Mon, 27 Oct 2014 05:32 AM IST
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उत्तरकाशी। हरिद्वार अर्द्धकुंभ की तैयारी में जुटी सरकार शीतकाल में गंगोत्री धाम में रहकर साधना करने वाले साधु-संतों की सुध लेने को राजी नहीं है। 46 साधु-संतों के साथ ही गंगोत्री मंदिर एवं आश्रमों के चौकीदार, पुलिस और वन विभाग के 24 कर्मचारी भी शीतकाल में गंगोत्री में ही निवास करते हैं। सर्दियों में करीब तीन माह तक बर्फ से पैक रहने वाले गंगोत्री में इन लोगों को बिजली, पानी, दूरसंचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं तो दूर ईंधन के लिए मिट्टी तेल तक मुहैया नहीं कराया जा रहा।
गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही धाम में सन्नाटा पसर गया है। यात्रा कारोबारी, तीर्थ पुरोहित, आश्रमों में रहने वाले साधु-संत शीतकाल के लिए निचले पड़ावों की ओर पलायन कर गए हैं। अब यहां रह गए हैं गुफाओं और कुटिया में साधना करने वाले 46 साधु संत, मंदिर एवं आश्रमों के चौकीदार, पुलिस एवं वन विभाग के 24 कर्मचारी। धाम के कपाट बंद होने के साथ ही यहां बिजली, पानी, दूरसंचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं समेट ली गई हैं।
कनखू बैरियर के पास राम मंदिर में रहने वाले स्वामी रामकृष्ण दास, दंडी आश्रम के पूर्णानंद ब्रह्मचारी, गुफा में रहकर साधना करने वाले स्वामी पद्मा गिरी, भगीरथ गिरी आदि साधुओं का कहना है कि सर्दियों में बर्फबारी के दौरान कई दिनों तक गुफा एवं कुटिया में कैद रहने की स्थिति बन जाती है। इस दौरान जलाने के लिए लकड़ी तक नहीं होती है।
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मिट्टी तेल और दवाएं मुहैया कराए सरकार
कनखू बैरियर के पास गुफा में रहने वाले रामदास बाबा ने बताया कि सर्दियों में प्रति साधु करीब साठ लीटर मिट्टी तेल की जरूरत होती है। डिमांड करने पर पूर्ति विभाग के अधिकारी ने सचिवालय से लिखवाकर लाने को कहा है। दस दिनों से देहरादून में सचिवालय के चक्कर काटने पर भी अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सर्दियों में चिकित्सक न सही, लेकिन कभी जरूरत पड़ने पर बीमार साधु संतों के लिए जरूरी दवाओं की व्यवस्था तो की ही जा सकती है।
यमुनोत्री में भी नहीं कोई व्यवस्था
कपाट बंद होने के बाद यमुनोत्री धाम में नेपाली बाबा और उनके चार सहयोगियों के साथ ही मंदिर के चौकीदार भी निवास करते हैं। सरकार की ओर से इनके लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। ये लोग अपने साधनों से ही व्यवस्था कर किसी तरह सर्दियों का सीजन काटते हैं।
शीतकाल में गंगोत्री में रहने वालों के लिए मिट्टी तेल की कोई व्यवस्था फिलहाल नहीं है। शासन से इनके लिए दस हजार लीटर मिट्टी तेल की डिमांड की गई है। तब तक जिले के कोटे से कुछ मिट्टी तेल गंगोत्री में वितरित कराया जाएगा।
केएल कोहली, जिला पूर्ति अधिकारी उत्तरकाशी।
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गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के साथ ही धाम में सन्नाटा पसर गया है। यात्रा कारोबारी, तीर्थ पुरोहित, आश्रमों में रहने वाले साधु-संत शीतकाल के लिए निचले पड़ावों की ओर पलायन कर गए हैं। अब यहां रह गए हैं गुफाओं और कुटिया में साधना करने वाले 46 साधु संत, मंदिर एवं आश्रमों के चौकीदार, पुलिस एवं वन विभाग के 24 कर्मचारी। धाम के कपाट बंद होने के साथ ही यहां बिजली, पानी, दूरसंचार एवं स्वास्थ्य सेवाएं समेट ली गई हैं।
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कनखू बैरियर के पास राम मंदिर में रहने वाले स्वामी रामकृष्ण दास, दंडी आश्रम के पूर्णानंद ब्रह्मचारी, गुफा में रहकर साधना करने वाले स्वामी पद्मा गिरी, भगीरथ गिरी आदि साधुओं का कहना है कि सर्दियों में बर्फबारी के दौरान कई दिनों तक गुफा एवं कुटिया में कैद रहने की स्थिति बन जाती है। इस दौरान जलाने के लिए लकड़ी तक नहीं होती है।
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मिट्टी तेल और दवाएं मुहैया कराए सरकार
कनखू बैरियर के पास गुफा में रहने वाले रामदास बाबा ने बताया कि सर्दियों में प्रति साधु करीब साठ लीटर मिट्टी तेल की जरूरत होती है। डिमांड करने पर पूर्ति विभाग के अधिकारी ने सचिवालय से लिखवाकर लाने को कहा है। दस दिनों से देहरादून में सचिवालय के चक्कर काटने पर भी अभी कोई कार्रवाई नहीं हुई। सर्दियों में चिकित्सक न सही, लेकिन कभी जरूरत पड़ने पर बीमार साधु संतों के लिए जरूरी दवाओं की व्यवस्था तो की ही जा सकती है।
यमुनोत्री में भी नहीं कोई व्यवस्था
कपाट बंद होने के बाद यमुनोत्री धाम में नेपाली बाबा और उनके चार सहयोगियों के साथ ही मंदिर के चौकीदार भी निवास करते हैं। सरकार की ओर से इनके लिए भी कोई व्यवस्था नहीं है। ये लोग अपने साधनों से ही व्यवस्था कर किसी तरह सर्दियों का सीजन काटते हैं।
शीतकाल में गंगोत्री में रहने वालों के लिए मिट्टी तेल की कोई व्यवस्था फिलहाल नहीं है। शासन से इनके लिए दस हजार लीटर मिट्टी तेल की डिमांड की गई है। तब तक जिले के कोटे से कुछ मिट्टी तेल गंगोत्री में वितरित कराया जाएगा।
केएल कोहली, जिला पूर्ति अधिकारी उत्तरकाशी।