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केंद्र सरकार ने 11 स्कूलों के उच्चीकरण के प्रस्ताव ठुकराए

Fri, 22 Nov 2013 05:43 AM IST
Uttar Kashi
Uttar Kashi Updated Fri, 22 Nov 2013 05:43 AM IST
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उत्तरकाशी। सीमांत जनपद उत्तरकाशी में आठवीं की बाद की पढ़ाई की राह आसान नहीं हो पा रही है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2013-14 में प्रस्तावित 12 जूनियर हाईस्कूलों में से 11 का प्रस्ताव छात्र संख्या कम होने पर ठुकरा दिया है। ऐसे में इन स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को आठवीं के बाद की पढ़ाई के लिए अब भी आठ से 20 किलोमीटर की पैदल दूरी नापनी पड़ेगी।
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शिक्षा विभाग ने राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत वर्ष 2013-14 में जिले के 12 जूनियर हाईस्कूलों के उच्चीकरण का प्रस्ताव तैयार किया था। इन विद्यालयों को हाईस्कूल का दर्जा मिलना था। विभाग ने इसी साल जून माह में सभी स्कूलों की सूची केंद्र सरकार को भेज दी थी, लेकिन सरकार ने मात्र जूनियर हाईस्कूल गढ़वालगाड को छोड़कर शेष सभी स्कूलों के प्रस्ताव ठुकरा दिए हैं। इसमें भटवाड़ी प्रखंड का जूनियर हाईस्कूल पिलंग और पुरोला डिंगाडी भी शामिल था। पिलंग के छात्र-छात्राएं आठवीं के बाद की पढ़ाई के लिए 18 किमी दूर हाईस्कूल मल्ला, डिंगाली के बच्चों को 17 किमी दूर पैदल जीआईसी गुंदियाटगांव और सरनौल आना पड़ता है। ऐसे में अधिकांश बच्चे विशेषकर छात्राएं आठवीं के बाद की पढ़ाई से वंचित रह जाती हैं।
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ये हैं उच्चीकरण के मानक
जूनियर हाईस्कूल के पांच किमी के दायरे में कोई भी हाईस्कूल नहीं होना चाहिए। विद्यालय में नवीं कक्षा में प्रवेश करने वाले छात्रों की संख्या 25 से अधिक होनी चाहिए। इसके साथ ही भवन निर्माण के लिए नि:शुल्क भूमि उपलब्ध हो।
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इन जूनियर हाईस्कूलों का प्रस्ताव ठुकराया
भटवाड़ी प्रखंड में पिलंग, डुंडा में ग्योनोटी एवं सिंगुणी, चिन्यालीसौड़ में गडोली, बगोडी एवं सूरी, नौगांव में बजलाड़ी, जांदणू एवं दियाड़ी, पुरोला में डिगाडी तथा मोरी में देवजानी-2।

कम संख्या होने पर किया वापस
क्षेत्रवासियों की मांग पर 12 जूनियर हाईस्कूलों के उच्चीकरण के प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजे गए थे जिसमें सरकार ने एक स्कूल का प्रस्ताव स्वीकार कर शेष कम छात्र संख्या पर वापस कर दिए। - एसपी सेमवाल, जिला शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी।


कोट......
बरसों से मांग करने पर भी अभी तक जूनियर हाईस्कूल का उच्चीकरण नहीं हो पाया। ऐसे में गांव के कई बच्चे आठवीं के बाद की पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं, जबकि गांव वाले स्कूल भवन के लिए नि:शुल्क भूमि देने के लिए भी तैयार हैं। पर्वतीय क्षेत्रों की दुर्गम स्थिति को देखते हुए सरकार को मानकों में शिथिलता बरतनी चाहिए। - बचन सिंह राणा, पूर्व प्रधान पिलंग भटवाड़ी।
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