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पांचवे दिन भी बंद रहा यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग, सरकार के रवैये पर जनता में रोष
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:44 PM IST
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बड़कोट। ओजरी-डबरकोट में लगातार भूस्खलन होने से यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पांचवें दिन भी बंद रहा। बुधवार को मौसम खुलने के बाद एनएच कर्मचारियों ने मार्ग खोलने का प्रयास किया, लेकिन भूस्खलन सक्रिय हो जाने से उन्हें पीछे हटना पड़ा। वहीं तिर्खली-कुंसाला वैकल्पिक मार्ग और जानकीचट्टी-यमुनोत्री धाम पैदल मार्ग भी जोखिमभरा बना हुआ है।
बता दें कि भारी बारिश के चलते ओजरी-डबरकोट स्लाइड जोन में भूस्खलन होने से यमुनोत्री हाईवे शनिवार को बाधित हो गया था, जिसे खोलने के लिए एनएच कर्मचारियों की टीम बीते पांच दिन से लगातार प्रयास कर रही है। बुधवार को भी मौसम खुलने के बाद एनएच कर्मचारियों ने जेसीबी मशीनों के साथ मलबा हटाना शुरू किया था, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी। वहीं जानकीचट्टी में वाहनों के साथ फंसे करीब 20 से अधिक यात्रियों का सब्र भी जवाब देने लगा है। प्रशासन की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण फंसे हुए यात्रियों को अपने खर्च पर ही खाने व रहने की व्यवस्था करनी पड़ रही है, लेकिन मार्ग एक-दो दिन के भीतर नहीं खुलने पर उनके आर्थिक हालात खराब होने की संभावना बनी हुई है। उधर, यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग और तिर्खली-कुंसाला वैकल्पिक मार्ग की खस्ताहाल पर तीर्थपुरोहितों एवं स्थानीय ग्रामीणों ने रोष व्यक्त किया है। पवन प्रकाश उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल, महावीर पंवार, जयपाल सिंह रावत आदि आक्रोशित लोगों ने कहा कि सरकार के रवैये को देखकर साफ है कि उसे आपदा प्रभावित यमुनोत्री धाम और यहां के निवासियों की कोई फिक्र नहीं है। यही वजह है कि अभी तक मुख्यमंत्री से लेकर शासन के किसी नेता ने क्षेत्र की सुध लेने की कोशिश तक नहीं की है।
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बता दें कि भारी बारिश के चलते ओजरी-डबरकोट स्लाइड जोन में भूस्खलन होने से यमुनोत्री हाईवे शनिवार को बाधित हो गया था, जिसे खोलने के लिए एनएच कर्मचारियों की टीम बीते पांच दिन से लगातार प्रयास कर रही है। बुधवार को भी मौसम खुलने के बाद एनएच कर्मचारियों ने जेसीबी मशीनों के साथ मलबा हटाना शुरू किया था, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी। वहीं जानकीचट्टी में वाहनों के साथ फंसे करीब 20 से अधिक यात्रियों का सब्र भी जवाब देने लगा है। प्रशासन की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिलने के कारण फंसे हुए यात्रियों को अपने खर्च पर ही खाने व रहने की व्यवस्था करनी पड़ रही है, लेकिन मार्ग एक-दो दिन के भीतर नहीं खुलने पर उनके आर्थिक हालात खराब होने की संभावना बनी हुई है। उधर, यमुनोत्री धाम के पैदल मार्ग और तिर्खली-कुंसाला वैकल्पिक मार्ग की खस्ताहाल पर तीर्थपुरोहितों एवं स्थानीय ग्रामीणों ने रोष व्यक्त किया है। पवन प्रकाश उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल, महावीर पंवार, जयपाल सिंह रावत आदि आक्रोशित लोगों ने कहा कि सरकार के रवैये को देखकर साफ है कि उसे आपदा प्रभावित यमुनोत्री धाम और यहां के निवासियों की कोई फिक्र नहीं है। यही वजह है कि अभी तक मुख्यमंत्री से लेकर शासन के किसी नेता ने क्षेत्र की सुध लेने की कोशिश तक नहीं की है।
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