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असी गंगा में पानी बढ़ने पर अलग-थलग पड़े छानियों में रह रहे ग्रामीण
Updated Wed, 25 Jul 2018 10:44 PM IST
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उत्तरकाशी। असी गंगा घाटी के अगोड़ा गांव के निकट घट्टूसौड़ में ट्राली के सहारे नदी पार करने की स्थिति नहीं बनने से मोरसुना, मोरापड़ा एवं सिल्याना की छानियों में रह रहे ग्रामीण अलग-थलग पड़ गए हैं। ग्रामीण गिरे पड़े पेड़ों के सहारे असी गंगा पार करने को मजबूर हैं।
अगस्त 2012 में असी गंगा में आयी बाढ़ में घट्टूसौड़ में बनी पुलिया बह गई थी। पुलिया के रास्ते अगोड़ा एवं दंदालका के ग्रामीण अपनी मोरसुना, सिल्याना एवं मोरापड़ा की छानियों तक आवाजाही करते थे। साथ ही यहां से दयारा ट्रैक का रास्ता भी था। पुलिया बहने के छह साल बाद भी यहां सुरक्षित आवाजाही के इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रशासन ने यहां एक ट्राली तो लगाई, लेकिन लगाने के बाद से इसकी सुध नहीं ली। यही कारण है कि ट्राली के तार ढीले होने से वजह से यह नदी के बीच में जाकर रुक जाती है।
पांच दिन पहले ट्राली के सहारे नदी पार करने के प्रयास में दंदालका गांव के चैन सिंह की अंगुली कट गई। इस भय से अब ग्रामीण ट्राली से आवाजाही नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों ने नदी पर गिरा पड़ा पेड़ डालकर किसी तरह असी गंगा पार करने का इंतजाम तो किया है, लेकिन इस रास्ते नदी पार करना खासा जोखिम भरा है। ऐसे में आजकल छानियों में रह रहे इन गांवों के करीब पचास परिवार अलग-थलग पड़े हुए हैं। अगोड़ा गांव निवासी सुरेश पंवार, सुमन पंवार, संजय पंवार, धर्मेंद्र, दंदालका के जसपाल रावत, बलवीर सिंह आदि ग्रामीणों ने प्रशासन ने शीघ्र ट्राली दुरुस्त कराने तथा पक्की पुलिया का निर्माण कराने की मांग की है।
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अगस्त 2012 में असी गंगा में आयी बाढ़ में घट्टूसौड़ में बनी पुलिया बह गई थी। पुलिया के रास्ते अगोड़ा एवं दंदालका के ग्रामीण अपनी मोरसुना, सिल्याना एवं मोरापड़ा की छानियों तक आवाजाही करते थे। साथ ही यहां से दयारा ट्रैक का रास्ता भी था। पुलिया बहने के छह साल बाद भी यहां सुरक्षित आवाजाही के इंतजाम नहीं किए गए हैं। प्रशासन ने यहां एक ट्राली तो लगाई, लेकिन लगाने के बाद से इसकी सुध नहीं ली। यही कारण है कि ट्राली के तार ढीले होने से वजह से यह नदी के बीच में जाकर रुक जाती है।
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पांच दिन पहले ट्राली के सहारे नदी पार करने के प्रयास में दंदालका गांव के चैन सिंह की अंगुली कट गई। इस भय से अब ग्रामीण ट्राली से आवाजाही नहीं कर रहे हैं। ग्रामीणों ने नदी पर गिरा पड़ा पेड़ डालकर किसी तरह असी गंगा पार करने का इंतजाम तो किया है, लेकिन इस रास्ते नदी पार करना खासा जोखिम भरा है। ऐसे में आजकल छानियों में रह रहे इन गांवों के करीब पचास परिवार अलग-थलग पड़े हुए हैं। अगोड़ा गांव निवासी सुरेश पंवार, सुमन पंवार, संजय पंवार, धर्मेंद्र, दंदालका के जसपाल रावत, बलवीर सिंह आदि ग्रामीणों ने प्रशासन ने शीघ्र ट्राली दुरुस्त कराने तथा पक्की पुलिया का निर्माण कराने की मांग की है।
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