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साधुओं ने की गुफाओं एवं कुटियाओं को कानूनी मान्यता देने की मांग
Updated Mon, 05 Mar 2018 10:52 PM IST
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उत्तरकाशी। गंगोत्री नेशनल पार्क के संरक्षित क्षेत्र में मौजूद गुफाओं एवं कुटियाओं में रह रहे साधुओं को वन विभाग की ओर से खदेड़ा जा रहा है। साधु सभा ने झाला से तपोवन तक करीब 110 गुफाओं एवं कुटियाओं को तपस्थली का दर्जा देकर तप साधना के लिए कानूनी अधिकार देने की मांग की है।
बता दें कि गंगोत्री क्षेत्र में साधु संत गुफाओं एवं कुटियाओं में रहकर साधना करते हैं, लेकिन यहां मौजूद दुर्लभ वन्य संपदा के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा गंगोत्री नेशनल पार्क बनाकर वन कानूनों की कई कठोर पाबंदियां लगा दी गई है। गंगोत्री साधु सभा के स्वामी राजाराम दास ने बताया कि वन कानून के नाम पर वनकर्मी आए दिन उनकी साधना में विघन डालते हैं। साधुओं की गुफाओं को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए जनपद के 300 से अधिक ग्राम पंचायतों एवं जिला पंचायतों से प्रस्ताव पारित करवाकर सरकार को सौंपा गया था। इस संबंध में राज्यपाल से भी वार्ता की गई थी, जिस पर उन्होंने मुख्यमंत्री से निर्णय लेने को कहा था। इसके बाद सरकार ने भी धर्मस्व विभाग से गुफा एवं कुटियाओं की रिपोर्ट तलब की है।
कोट.....
गंगोत्री नेशनल पार्क बनने से पहले से ही भोजवासा, तपोवन क्षेत्र में साधु संत स्थायी रूप से गुफाओं एवं कुटियाओं का उपयोग करते आए हैं। साधु समाज के मांग पत्र को शासन में भेज दिया है।
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श्रवण कुमार, उप निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क उत्तरकाशी।
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बता दें कि गंगोत्री क्षेत्र में साधु संत गुफाओं एवं कुटियाओं में रहकर साधना करते हैं, लेकिन यहां मौजूद दुर्लभ वन्य संपदा के संरक्षण के लिए सरकार द्वारा गंगोत्री नेशनल पार्क बनाकर वन कानूनों की कई कठोर पाबंदियां लगा दी गई है। गंगोत्री साधु सभा के स्वामी राजाराम दास ने बताया कि वन कानून के नाम पर वनकर्मी आए दिन उनकी साधना में विघन डालते हैं। साधुओं की गुफाओं को कानूनी मान्यता दिलाने के लिए जनपद के 300 से अधिक ग्राम पंचायतों एवं जिला पंचायतों से प्रस्ताव पारित करवाकर सरकार को सौंपा गया था। इस संबंध में राज्यपाल से भी वार्ता की गई थी, जिस पर उन्होंने मुख्यमंत्री से निर्णय लेने को कहा था। इसके बाद सरकार ने भी धर्मस्व विभाग से गुफा एवं कुटियाओं की रिपोर्ट तलब की है।
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गंगोत्री नेशनल पार्क बनने से पहले से ही भोजवासा, तपोवन क्षेत्र में साधु संत स्थायी रूप से गुफाओं एवं कुटियाओं का उपयोग करते आए हैं। साधु समाज के मांग पत्र को शासन में भेज दिया है।
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श्रवण कुमार, उप निदेशक गंगोत्री नेशनल पार्क उत्तरकाशी।