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कलक्ट्रेट परिसर में ही कूड़ा जलाकर उड़ा रहे पर्यावरण नियमों की धज्जियां
Updated Sun, 11 Feb 2018 11:08 PM IST
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उत्तरकाशी। स्वच्छ भारत अभियान का मकसद केवल कूड़ा एकत्र करना ही नहीं, बल्कि उसे वैैैज्ञानिक तरीके से निस्तारित करना भी था। जिला मुख्यालय में स्वच्छता के नाम पर कूड़ा तो उठ रहा है, लेकिन निस्तारण की व्यवस्था न होने के कारण कूड़े के ढेरों को खुले में जलाया जा रहा है।
खुले में कूड़ा जलाने से मानव स्वास्थ्य सहित पर्यावरण तंत्र को भी काफी नुकसान होता है। विशेषज्ञों के अनुसार कूड़े में मौजूद प्लास्टिक, रबर व अन्य तत्व जलने पर जहरीली गैस पैदा होती है, जो फेफड़ों, आंखों, दिल आदि की बीमारियां पैदा करने के साथ ही जीव जंतुओं व वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचती है। इसी को देखते हुए एनजीटी ने वर्ष दिसंबर 2016 में कूड़ा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके तहत थोड़ा कूड़ा जलाने पर 5 हजार रुपये व डंपिंग जोन में कूड़ा जलाने पर 25 हजार तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान था।
हालांकि ईको सेंसिटिव जोन में शामिल जिला मुख्यालय क्षेत्र में खुलेआम इन नियमों से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थिति यह है कि कलक्ट्रेट परिसर में खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से कई बार कॉपेक्टर मशीन लाने व कूड़े का सही से निस्तारण करने के दावे भी किए गए हैं, लेकिन कोई परिणाम नहीं मिला है।
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कोट:
खुले में कूड़ा जलाना गलत है, अगर कोई ऐसा कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जनपद के गंगोत्री, पुरोला, बड़कोट आदि स्थानों पर कॉपेक्टर मशीन मौजूद है, हालांकि जिला मुख्यालय में अभी तक मशीन नहीं लग पाई है। जल्द ही मशीन खरीदकर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था को पटरी में लाया जाएगा। - डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।
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खुले में कूड़ा जलाने से मानव स्वास्थ्य सहित पर्यावरण तंत्र को भी काफी नुकसान होता है। विशेषज्ञों के अनुसार कूड़े में मौजूद प्लास्टिक, रबर व अन्य तत्व जलने पर जहरीली गैस पैदा होती है, जो फेफड़ों, आंखों, दिल आदि की बीमारियां पैदा करने के साथ ही जीव जंतुओं व वनस्पतियों को भी नुकसान पहुंचती है। इसी को देखते हुए एनजीटी ने वर्ष दिसंबर 2016 में कूड़ा जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। इसके तहत थोड़ा कूड़ा जलाने पर 5 हजार रुपये व डंपिंग जोन में कूड़ा जलाने पर 25 हजार तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान था।
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हालांकि ईको सेंसिटिव जोन में शामिल जिला मुख्यालय क्षेत्र में खुलेआम इन नियमों से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थिति यह है कि कलक्ट्रेट परिसर में खुलेआम कूड़ा जलाया जा रहा है। प्रशासन की ओर से कई बार कॉपेक्टर मशीन लाने व कूड़े का सही से निस्तारण करने के दावे भी किए गए हैं, लेकिन कोई परिणाम नहीं मिला है।
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कोट:
खुले में कूड़ा जलाना गलत है, अगर कोई ऐसा कर रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। जनपद के गंगोत्री, पुरोला, बड़कोट आदि स्थानों पर कॉपेक्टर मशीन मौजूद है, हालांकि जिला मुख्यालय में अभी तक मशीन नहीं लग पाई है। जल्द ही मशीन खरीदकर कूड़ा निस्तारण की व्यवस्था को पटरी में लाया जाएगा। - डा. आशीष चौहान, जिलाधिकारी उत्तरकाशी।