फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Uttarkashi News ›   ईको सेंसिटिव जोन में माईक्रो हाईडिल को बढ़ावा देने की तैयारी

ईको सेंसिटिव जोन में माईक्रो हाईडिल को बढ़ावा देने की तैयारी

Wed, 07 Feb 2018 10:44 PM IST
Updated Wed, 07 Feb 2018 10:44 PM IST
विज्ञापन
ईको सेंसिटिव जोन में माईक्रो हाईडिल को बढ़ावा देने की तैयारी
उत्तरकाशी। गंगा भागीरथी के अविरल प्रवाह के लिए बड़ी जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण पहले ही बंद किया जा चुका है। अब ईको सेंसिटिव जोन की बंदिशों के चलते 2 मेगावाट से अधिक क्षमता की बिजली परियोजनाओं का निर्माण भी नहीं हो रहा है। ऐसे में क्षेत्र की बिजली जरूरतों की पूर्ति के लिए उरेडा ने माइक्रो हाइडिल और सौर ऊर्जा आधारित परियोजनाओं की कवायद तेज कर दी है। अपर भागीरथी घाटी में दो मेगावाट से कम क्षमता की नौ परियोजनाएं चिह्नित की गई हैं।
विज्ञापन

अविरल गंगा के नाम पर निर्माणाधीन 600 मेगावाट की लोहारीनाग-पाला एवं 480 मेगावाट की पाला-मनेरी और स्वीकृत 391 मेगावाट की भैरोंघाटी बिजली परियोजना पहले ही बंद की जा चुकी है। अब ईको सेंसिटिव जोन की बंदिशों के चलते अपर भागीरथी घाटी में ककोड़ागाड, सियांगाड एवं जालंधरी आदि गंगा की सहायक नदियों पर प्रस्तावित एवं स्वीकृत 82.5 मेगावाट की दस जल विद्युत परियोजनाएं विभिन्न स्तरों पर रुकी पड़ी हैं। राज्य सरकार इन परियोजनाओं को चालू कराने की पैरवी कर तो रही है, लेकिन परिणाम आने अभी बाकी हैं।
विज्ञापन

इस बीच उरेडा ने गंगोत्री सहित उपला टकनौर क्षेत्र के आठ गांवों को पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए अपने माइक्रो हाइडिल प्रोजेक्ट को अपग्रेड करने की तैयारी शुरू कर दी है। गंगोत्री में केदारगंगा पर बनी 20 किलोवाट, रुद्रगैरा पर 150 किलोवाट एवं हर्षिल की 200 किलोवाट वाली परियोजनाओं की क्षमता बढ़ाने की योजना है। क्षेत्र में सोलर पैनल से अपने उपयोग के अतिरिक्त बिजली ग्रिड में देकर लाभ कमाने की योजना पर भी काम चल रहा है। हर्षिल में डा. नागेंद्र रावत के घर इसका सफल प्रयोग किया जा चुका है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पर्यटन एवं कुटीर उद्योगों के लिए जरूरी है बिजली
एनजीटी के सदस्य एवं पर्यावरणविद् चंडी प्रसाद भट्ट भी स्वीकारते हैं कि सीमावर्ती क्षेत्र में पर्यटन एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बिजली की जरूरत है। इसके लिए सौर ऊर्जा के साथ ही गंगा की सहायक नदियों पर दो मेगावाट तक क्षमता वाली परियोजनाओं पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सौ किलोवाट तक की छोटी परियोजनाएं ग्राम पंचायत की भागीदारी से बनाई जा सकती हैं। इसके अलावा पनचक्कियों (घराट) से भी बिजली उत्पादन की संभावनाएं हैं। उन्होंने भागीरथी घाटी में सौरा, बगोरी, इंद्रावती, स्वारीगाड, वरुणा, हेलगू, जालंधरी, खीरगंगा आदि गंगा भागीरथी की सहायक नदियों में 100-100 किलोवाट की बिजली परियोजनाओं की वकालत की।


कोट.........
सोलर पावर पैक के अलावा दो मेगावाट से कम क्षमता की नौ परियोजनाएं चिह्नित कर महायोजना में शामिल की गई हैं। इनका विस्तृत अध्ययन कराकर उत्पादन क्षमता का पता लगाया जाएगा। हर्षिल एवं गंगोत्री की परियोजनाओं में क्षमता विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है।
मनोज कुमार, परियोजना अधिकारी उरेडा उत्तरकाशी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed