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स्वच्छता के लिए सामाजिक नजरिये में बदलाव लाने की जरुरत 14-28-07

Tue, 31 Oct 2017 10:50 PM IST
Updated Tue, 31 Oct 2017 10:50 PM IST
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स्वच्छता के लिए सामाजिक नजरिये में बदलाव लाने की जरुरत 14-28-07

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उत्तरकाशी। पर्यावरण स्वच्छता व स्वच्छ जीवन शैली के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए स्वैच्छिक शिक्षक समूह, लोकरंग संगठन तथा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन द्वारा संगोष्ठी का आयोजन किया गया। नगर निगम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों, स्वयंसेवियों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया गया। इस मौके पर ‘जल थल मल’ पुस्तक के लेखक सोपन जोशी ने स्वच्छता के प्रति भारतीय सामाज के नजरिये के बारे में जानकारी दी।

जोशी ने कहा कि हम जो कुछ भी मिट्टी से ले रहे हैं, उसे हमारे पेट से होते हुए वापस मिट्टी में ही मिल जाना चाहिए। उन्होंने ऐसे शौचालयों को विकसित करने का जिक्र किया जिनमें मल और मूत्र को अलग-अलग एकत्र किया जा सके। इससे पानी की बचत के साथ ही जमीन भी उर्वरक होगी। कहा कि हमें हर बात के लिए सरकार की ओर देखने के बदले सामाजिक रूप से कुछ सार्थक पहल करनी चाहिए। कार्यक्रम में अनिल बडोला, ध्यान सिंह रावत, अनिल नौटियाल, संगीता जोशी, आशीष त्रिपाठी, संजीव बिजल्वाण, ओम बधाणी, सुरेंद्र पुरी, गोपाल थपलियाल, द्वारिका सेमवाल, कमलेश गुरुरानी, विवेक सोनी, प्रमोद पैन्यूली आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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