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स्वास्थ्य विभाग ने मोटे कमीशन के लिए खरीदी करोड़ों की मशीन
अनिल चन्दोला/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 01 Apr 2016 11:48 AM IST
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उत्तराखंड स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तीन सीटी स्कैन मशीनें लोगों की सुविधा के लिए नहीं बल्कि मोटे कमीशन के लालच में खरीदी थी।
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यही कारण है कि ना तो मशीन खरीदने से पहले और ना ही खरीदने के बाद इनको चलाने को लेकर कोई फैसला लिया गया। कमीशन वसूलने के बाद अधिकारियों ने इन मशीनों की तरफ देखने की जहमत तक नहीं उठाई। यही कारण है कि तीन साल बीतने के बाद भी इन मशीनों से काम शुरू नहीं हो पाया है।
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करीब तीन वर्ष पहले स्वास्थ्य विभाग ने हल्द्वानी, पौड़ी और रुड़की के लिए सीटी स्कैन मशीनें खरीदी थी। करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से खरीदी गई इन मशीनों का तीन साल में एक बार भी उपयोग नहीं हो सका है। अमर उजाला ने बृहस्पतिवार के अंक में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
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इसके बाद जो तस्वीर उभरकर सामने आई है, उसमें विभागीय अधिकारियों के भ्रष्टाचार का खुलासा होता है। अधिकारियों ने तीनों मशीनों को खरीदने से पहले इन्हें चलाने के लिए रेडियोलॉजिस्ट तैनात करने जैसी संभावनाओं पर विचार नहीं किया। मशीन खरीदने के बाद तीन साल में कभी इनकी तैनाती को लेकर भी गंभीरता से काम नहीं हुआ।
सूत्रों के अनुसार इन मशीनों की खरीद के पीछे मोटे कमीशन के खेल को मुख्य कारण माना जा रहा है। करोड़ों रुपये की खरीद में अधिकारियों ने जमकर बंदरबांट की। इस मामले में कई अधिकारियों की भूमिका सवालों के घेरे में हैं।
कोटद्वार पर मेहरबानी
पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य विभाग कोटद्वार पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान है। हालांकि यह मेहरबानी लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय केवल मशीनों की खरीदारी तक सीमित रही। इसके पीछे कोटद्वार को तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री का विधानसभा क्षेत्र होना कारण माना जा रहा है। पिछले कुछ समय में कोटद्वार के लिए एक एमआरआई मशीन और एक सीटी स्कैन मशीन खरीदने की प्रक्रिया चल रही है।
मशीन ठीक करने में नहीं खरीदने में दिलचस्पी
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की दिलचस्पी पुरानी मशीनों को ठीक कराने में नहीं बल्कि नई मशीन खरीदने में है। आलम यह है कि नई मशीन खरीद की फाइल जहां सरपट दौड़ रही है वहीं खराब मशीन की मरम्मत की फाइल धूल फांक रही है। यही कारण है कि करीब छह माह बीतने के बावजूद मशीन की मरम्मत के लिए करीब 22 लाख रुपए का वार्षिक करार तक नहीं हो पाया है।
अल्मोड़ा के पंडित गोवर्धन तिवारी बेस चिकित्सालय में कुमाऊं के पहाड़ी जिलों की एकमात्र सीटी स्कैन मशीन लगी हुई है। अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक पिछले कई माह से महानिदेशालय को पत्र भेजकर सीएएमसी करने का अनुरोध कर रहे हैं ताकि मशीन खराब होने की स्थिति में उसे ठीक करवाया जा सके।
इसके लिए अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक पिछले वर्ष जून से लगातार पत्राचार कर रहे हैं। उन्होंने पिछले वर्ष दो जून, एक अगस्त, नौ दिसंबर और इस वर्ष तीन मार्च को पत्र भेजकर सीएएमसी करने का अनुरोध किया लेकिन निदेशालय अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।
अब करार ना होने के कारण मशीन की मरम्मत नहीं हो पा रही है, जिसके कारण मरीजों को टेस्ट के लिए हल्द्वानी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बुधवार को मशीन ठीक होने का दावा कर रहे संयुक्त निदेशक डा. मनु जैन ने बृहस्पतिवार को इस मामले में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। वहीं इस मामले में स्वास्थ्य महानिदेशक डा. कुसुम नरियाल का पक्ष जानने के लिए उन्हें कई बार फोन किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं किया।
क्या है सीएएमसी
स्वास्थ्य विभाग अपनी मशीनों की मरम्मत के लिए वार्षिक करार करता है। इसे ही कंप्रिहेंसिव एनुअल मेंटेनेंस कांट्रेक्ट (सीएएमसी) कहा जाता है। इसके तहत करार में चुनी गई कंपनी सालभर तक सभी मशीनों की मरम्मत करती है। करार के बाद कंपनी को मशीनों की मरम्मत के लिए अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ता है।