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उफनाते गदेरे घरों में घुसे, दर्जनों मकान दफन
गढ़वाल/ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2013 09:01 AM IST
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जून की आपदा के बाद जुलाई में भी कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गढ़वाल के कई जिलों में हो रही मूसलाधार बारिश ने स्थानीय लोगों के दिन का चैन और रात की नींद उड़ा दी है। गदेरे उफान पर है तो पहाड़ से भूस्खलन हो रहा है। इसमें उनके जीवन भर की पूंजी के साथ जिंदगी भी दफन हो रही है।
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उत्तरकाशी में मूसलाधार बारिश से भागीरथी से मिलने वाली असी गंगा समेत गाड़-गदेरे फिर से उफान पर आ गए हैं। इससे लोग रातभर नहीं सो सके। असी गंगा घाटी के ढासड़ा, दंदालका आदि गांवों में भी अतिवृष्टि से भारी नुकसान हुआ है। भागीरथी की बाढ़ में नाकुरी स्थित नागेश्वर धाम उजड़ने के बाद अब यहां खतरा और बढ़ गया है। बड़कोट के बनास गांव पर छाड़का गदेरा उफान पर है, जिससे लोगों के सिर पर खतरा मंडरा रहा है।
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मोरी ब्लाक के माकुड़ी गांव में अतिवृष्टि के कारण सेब के बागीचे में आए मलबे में दब जाने से 12 वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। तेफना, बांतोली, सुनाली और जेटी के बाद अब कपीरी पट्टी के बणसोली और सेरागाड़ में कई घराट, सैकड़ों नाली भूमि बहा गई है, वहीं करीब 12 मकान खतरे की जद में हैं। एक घर पर पैदल मार्ग का पुश्ता आ गिरा, जिससे मंजू नामक महिला घायल हो गई।
नई टिहरी के जाखणीधार प्रखंड में ग्राम चाह गडोलिया में कई घर ढह गए। जबकि भिलंगना प्रखंड के ग्राम पंचायत पाख में बारिश से हुए भूस्खलन से एक मकान मलबे में दब गया, इससे एक महिला गंभीर घायल हो गई। मकान के अंदर 20 बकरियां भी दफन हो गईं। पिंस्वाड़ गांव में दस मकान भूस्खलन की चपेट में आने से जमींदोज हो गए।
स्टेडियम का हिस्सा नदी में समाया
एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के चौरास परिसर पर अलकनंदा ने फिर कहर बरपाया। बृहस्पतिवार सुबह चौरास परिसर के स्टेडियम की पूर्वी दीवार नदी में समा गई। साथ ही गार्ड रूम और हाल ही में बिछाई गई पाइप लाइन भी बह गई।
राजमार्गों पर छाया रहा संकट
बदरीनाथ हाईवे में बिराजकुंज के पास बृहस्पतिवार को दूसरे दिन भी वाहनों की आवाजाही ठप रही। इससे जिला मुख्यालय और जोशीमठ में सब्जी, दूध, अखबार जैसी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित रही। मंगलवार देर रात हुई बारिश से बिराजकुंज के पास हाईवे करीब 20 फीट तक बह गया था, जिसे बनाने में बीआरओ लगा हुआ है। उधर, गंगोत्री राजमार्ग नालूपाणी, बड़ेथी चुंगी में भूस्खलन से अवरुद्ध हो गया। वहीं यमुनोत्री राजमार्ग खोलने का काम कछुआ गति से चल रहा है। इससे दर्जनों गांव अलग-थलग पड़े हैं।
रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हैं ग्रामीण
तेफना गदेरे में बादल फटने के दूसरे दिन भी तेफना और बांतोली गांव के ग्रामीण दहशत में हैं। प्रभावित परिवार अपने घरों को छोड़कर मंगरोली, नंदप्रयाग और थिरपाक में रिश्तेदारों के घर चले गए हैं। बुधवार रात्रि हुई बारिश से फिर गदेरे का मलबा और पानी ग्रामीणों के घरों और दुकानों में घुस गया। बृहस्पतिवार को ग्रामीणों ने क्षतिग्रस्त भवनों से अपना जरूरी सामान निकाला और सुरक्षित स्थानों पर चले गए।
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