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उत्तराखंड में शिक्षा विभाग बना धृतराष्ट्र
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 19 Apr 2016 10:30 PM IST
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शिक्षा के अधिकार अधिनियम
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शिक्षा विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के चलते प्रदेश में शिक्षा के अधिकार (आरटीई) का फायदा छह से 14 आयु वर्ग के गरीब बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। इसकी गवाही पिछले साल के आंकड़े दे रहे हैं, जिसके तहत प्रदेश में आठ हजार से अधिक सीटें खाली रह गई हैं।
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शिक्षा सत्र 2015-16 में पब्लिक स्कूलों ने आरटीई के तहत सबसे छोटी कक्षा में ही बच्चों के एडमिशन लिए। ऐसी स्थिति में छह से 14 आयु वर्ग के बीच के बच्चों को किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं मिला।
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विभागीय अधिकारियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया, जबकि आरटीई एक्ट में छह से 14 वर्ष के पात्र बच्चों को एडमिशन दिए जाने का प्रावधान है। यह अनदेखी इस सत्र में भी जारी है।
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यह है प्रावधान
शिक्षा के अधिकार के तहत छह वर्ष से अधिक उम्र के ऐसे बच्चे जिनका किसी स्कूल में प्रवेश नहीं नहीं हो पाया है, या किसी कारण प्रारंभिक शिक्षा को पूरा नहीं कर पाए हैं, उन्हें अपनी उम्र के मुताबिक उपयुक्त कक्षा में दाखिला दिया जाए। ऐसे बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से दूसरे बच्चों के बराबर आने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिए जाने का भी प्रावधान है।
आरटीई एक्ट के बावजूद यह समस्या बनी है कि यदि कोई आठ साल का पात्र बच्चा है तो वह कहां जाएगा, स्कूल केवल अपनी पहली कक्षा में दाखिला दे रहे हैं।
-तृप्ता शर्मा, आरटीई जिला प्रभारी