{"_id":"b56d9dba-e5e7-11e2-8462-d4ae52bc57c2","slug":"uttarakhand-disaster-77","type":"story","status":"publish","title_hn":"मदद को गए थे, लेकिन खुद ही फंस गए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मदद को गए थे, लेकिन खुद ही फंस गए
गंगा असनोड़ा थपलियाल
Updated Sat, 06 Jul 2013 08:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केदारनाथ में कार्य कर रहे विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मचारियों को रसद और अन्य जरूरत का सामान पहुंचा रहे चॉपर तीन दिनों से उड़ान नहीं भर पाए हैं जिससे अधिकारी-कर्मचारी वहीं फंसे हुए हैं।
विज्ञापन
केदारनाथ क्षेत्र में संचार के लिए प्रयोग किए जा रहे सेटेलाइट फोन पर लगी बैटरियां भी जवाब दे गई हैं। जिससे वहां मौजूद 74 अधिकारियों-कर्मचारियों से संपर्क कट गया है। तीन और चार जुलाई को चॉपर ने केदारनाथ के लिए उड़ान तो भरी, लेकिन गौरीकुंड से ऊपर नहीं जा सके।
विज्ञापन
दो जुलाई को चॉपर ने भरी थी अंतिम उड़ान
केदारनाथ में सामूहिक दाह संस्कार के कार्य में टीमें जुटी हुई हैं। जिसमें 46वीं वाहिनी पीएसी के एडिशनल एसपी असिस्टेंट कमांडेंट देवेंद्र पिचा समेत तीन दर्ज पुलिस विभाग के कर्मचारी, 18 लोक निर्माण विभाग, एनडीआरएफ के जवान, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, स्वास्थ्य विभाग तथा पशु पालन विभाग के डॉक्टर और फार्मसिस्ट सहित एनआईएम का 10 सदस्यीय दल शामिल है।
विज्ञापन
इन लोगों के लिए चॉपर से रसद तथा सेटेलाइट फोन चलाने के लिए बैटरी आदि सभी जरूरत का सामान भेजा जा रहा था। तीन दिन पूर्व दो जुलाई को शाम चार बजे चॉपर ने केदारनाथ के लिए अंतिम उड़ान भरी। इसके बाद से लगातार बारिश तथा मौसम खराब रहने से कोई भी चॉपर सामान लेकर नहीं जा पाया है।
पढ़े, उत्तराखंड की खबरों की विशेष कवरेज
सूत्रों की मानें, तो केदारनाथ में मौजूद लोगों के लिए बृहस्पतिवार तक के लिए ही रसद थी, जिससे शुक्रवार को कर्मी-अधिकारी भोजन तक नहीं कर पाए। शुक्रवार दोपहर तक किसी तरह सेटेलाइट फोन से बात तो हुई, लेकिन बैटरी वीक हो जाने से बात पूरी नहीं हो पाई।
गढ़वाल कमिश्नर भी फंसे
स्वयं गढ़वाल कमिश्नर सुवर्द्धन गुप्तकाशी में केदारनाथ में सामूहिक दाह संस्कार तथा क्षेत्र में अन्य राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए डटे हुए हैं। उन्होंने बताया कि केदारनाथ में 74 लोग विभिन्न विभागों से हैं, जिन्हें लेने के लिए शनिवार को चॉपर भेजने की कोशिश की जाएगी। यदि मौसम साफ नहीं रहा, तो पैदल रास्तों की मदद से इन कर्मियों को हर हाल में निकाला जाएगा।