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पंचकेदारों में पसरा सन्नाटा
प्रमोद सेमवाल
Updated Fri, 05 Jul 2013 08:40 AM IST
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केदारनाथ जल प्रलय के बाद चारधामों के साथ ही पंच केदार मंदिर भी तीर्थयात्रियों के बिना सूने पडे़ हैं। अब स्थानीय ग्रामीण ही इन मंदिरों में पूजा-अर्चना कर धार्मिक मान्यता निभा रहे हैं।
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चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में पंच केदार मौजूद हैं, जहां यात्रा काल में सैकड़ों तीर्थयात्री उमड़ते हैं। मान्यता है कि जब पांच पांडव गोत्र हत्या से मुक्ति पाने के लिए हिमालय क्षेत्र की ओर जा रहे थे, तो भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन नहीं दिए और केदारनाथ चले गए।
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जब पांडव उनके पीछे गए, तो भोलेनाथ हिमालय क्षेत्र में मुंह के बल समा गए, जिससे उनका पश्च भाग केदारनाथ में, मुख रुद्रनाथ, भुजा तुंगनाथ, नाभी मध्यमहेश्वर और जटा कल्पेश्वर में निकली। जिन-जिन जगहों पर केदारनाथ के अंग प्रकट हुए, वहां-वहां पंच केदारों की स्थापना हुई।
पंच केदार-
केदारनाथ- यह मंदिर हिमालय क्षेत्र में मौजूद हैं। यहां केदारनाथ के पश्च भाग की पूजा होती है। यह मंदिर 3583 मी की ऊंचाई पर स्थित है।
मध्यमहेश्वर- यहां केदारनाथ के नाभि की पूजा होती है। स्थानीय ब्राह्मण मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। यह मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ क्षेत्र में है। यह मंदिर 3490 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।
तुंगनाथ- यहां केदारनाथ के भुजाओं की पूजा होती है। मंदिर रुद्रप्रयाग जनपद के चोपता बुग्याल से तीन किमी की दूरी पर स्थित है। यहां यात्राकाल में तीर्थयात्रियों का तांता लगा रहता है। यह मंदिर 3680 मी. की ऊंचाई पर स्थित है।
रुद्रनाथ- रुद्रनाथ मंदिर में केदारबाबा के मुख की पूजा होती है। यह तीर्थ सबसे दूरस्थ बुग्याल क्षेत्र में मौजूद है। यहां पहुंचने के लिए गोपेश्वर से 19 किमी पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। यह मंदिर 2286 मी. की ऊंचाई पर स्थित है।
कल्पेश्वर- चमोली जनपद के उर्गम घाटी में कल्पेश्वर मंदिर स्थित है। यहां बाबा केदार की जटाओं की पूजा होती है। यहां कल्प वृक्ष के नीचे कल्पेश्वर महादेव का मंदिर स्थित है। यह मंदिर 2200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।