उत्तराखंड का सियासी संकट लाया भाजपा के लिए बड़ी 'चुनौती'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के सियासी संग्राम में अब भाजपा के लिए अब यू-टर्न लेने की गुंजाइश नहीं के बराबर रह गई है।
भाजपा सरकार गठित कर दस महीने सुशासन देने का प्रयास करेगी, ताकि चुनावी फायदा पहुंचे। भाजपा के ही रणनीतिकार पिछली बार बीसी खंडूड़ी के चार महीने का कार्यकाल का उदाहरण पेश कर रहे हैं। सब जानते हैं कि 18 मार्च को हुए घटनाक्रम से अभी तक जो भी हुआ, उसकी तह में भाजपा ही थी।
विगत 18 मार्च को जिस दिन बजट पर वोटिंग के दौरान सरकार को गिराने की रणनीति बनी थी, उस दिन यह भी तय हुआ था कि भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी, लेकिन राज्यपाल द्वारा बहुमत के लिए हरीश रावत का दिए गए समय ने सारा खेल बिगाड़ दिया।
भाजपा के सामने अब दो चुनौती
अब भी भाजपा जिस जगह आकर खड़ी हो गई है, वहां से वापसी के रास्ते बहुत सीमित हैं। इसलिए शुरू हो चुके इस सियासी संग्राम से यू-टर्न लेने का मतलब होगा कि भाजपा ने पीठ दिखाकर भाग गई। भाजपा के सामने अब दो चुनौती हैं।
एक तो कांग्रेस की सरकार बनने से रोकना और दूसरा कांग्रेस के नौ असंतुष्टों को सहेजकर रखना। क्योंकि यदि कांग्रेस की सरकार का गठन हुआ तो कैसा शासन होगा और उसका भाजपा पर क्या फर्क पड़ेगा, अभी यह कहना मुश्किल है।
दूसरे, यदि कांग्रेस के असंतुष्टों को भाजपा ने उनके हाल पर छोड़ दिया तो भी नुकसान की आशंका बनी रहेगी। क्योंकि नौ असंतुष्टों को राजनीति का अपना ठोर तो तलाशना ही है, यदि भाजपा ने बचने की कोशिश की तो इन सभी नौ नेताओं की दिशा बदल भी सकती है।
सरकार बनाकर पैकेज देने की तैयारी
भाजपा का शीर्ष नेतृत्व राज्य में इन हालात में सरकार गठन करना चाहता है। इस विचारधारा वाले नेता सरकार बनाने को आतुर है, लेकिन फिलहाल मामला कोर्ट में लटक गया है।
तैयारी यह है कि सरकार बनाकर केंद्र से राज्य को भारी भरकम पैकेज दिलवा दिया जाए। पैकेज दिलाने के बाद राज्य में विकास की गति तेज कर दी जाए और निरंतर अनुश्रवण किया जाए तो चुनाव में भाजपा को फायदा मिलेगा।
अंदरखाने विरोध की रणनीति को भी बल
भगत सिंह कोश्यारी का नाम जबसे मुख्यमंत्री पद के लिए आगे आया है, तब से भाजपा का एक खेमा रोकने के लिए सक्रिय हो गया है।
सूत्रों की माने तो एक नेता ने भगतदा के विरोधी और अपने समर्थक विधायकों को अलर्ट कर दिया है। इन विधायकों से केंद्रीय नेताओं को फोन कराए जा रहे हैं कि यदि सरकार बनी तो जनता में इसका गलत प्रभाव पड़ेगा।