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‘फ्लोर टेस्ट’ के बाद डैमेज कंट्रोल करने में जुटी भाजपा

Thu, 12 May 2016 10:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 12 May 2016 10:18 AM IST
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uttarakhand bachao yatra second phage.
अजय भट्ट - फोटो : file photo
विधानसभा में विश्वास मत गंवाने वाली भाजपा अब नए सिरे से कांग्रेस सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को घेरने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट ने पत्रकार वार्ता कर इसका औपचारिक एलान भी कर दिया है।
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प्रदेश अध्यक्ष भट्ट ने कहा कि उत्तराखंड बचाओ यात्रा का दूसरा चरण जल्द ही शुरू किया जाएगा, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री की करतूतों को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। वहीं विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों की नए सिरे से समीक्षा के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीमकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से गुजारिश की जाएगी।
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विधानसभा में विश्वास मत गंवाने के मुद्दे पर कहा कि 71 विधायकों के संख्या बल के आधार पर कांग्रेस आज भी अल्पमत में है। कांग्रेस और पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने 10 विधायकों को गंवाया हैं। कांग्रेस सरकार तो उसी दिन गिर गई थी, जिस दिन पार्टी के नौ विधायकों ने साथ छोड़ दिया था। कहा कि राज्य में पहली बार राष्ट्रपति शासन के लिए भाजपा नहीं कांग्रेस जिम्मेदार है। प्रदेश अध्यक्ष ने पीडीएफ को भी कटघरे में खड़ा किया। कहा कि कांग्रेस को समर्थन देने से पीडीएफ और बसपा नेताओें का चेहरा बेनकाब हुआ है।
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रावत को अपने ही विधायकों को पड़ा खरीदना: भट्ट

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अजय भट्ट - फोटो : AmarUjala

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि हरीश रावत की स्थिति यह है कि सरकार बचाने के लिए उन्हें अपने ही विधायकों को खरीदना पड़ा। उन्होंने हरीश रावत पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने, शराब माफिया को बढ़ावा देने, खनन में उगाही करने, जैसे कई गंभीर आरोप लगाए। भट्ट ने विधानसभा अध्यक्ष पर भी हमला बोला। कहा कि उन्होंने अपने संवैधानिक अधिकारियों का दुरुपयोग किया। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के अधिकारों की भी नए सिरे से संवैधानिक समीक्षा किए जाने की वकालत की। 

तकनीकी कारणों से हटा राष्ट्रपति शासन
राज्य में राष्ट्रपति शासन को तकनीकी कारणों के चलते हटाना पड़ा है। आज कांग्र्रेस के पास बहुमत है, लेकिन यह भी हकीकत है कि 18 मार्च को कांग्रेस के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं था, जिसके चलते ही वित्त विनियोग विधेयक गिर गया था। हरीश रावत विधायकों की खरीद फरोख्त कर रहे थे, यह बात स्टिंग आपरेशन से साबित हो चुकी है। पूरे प्रकरण के दौरान विधानसभाध्यक्ष की भूमिका संदेह के घेरे में रही। उन्होंने स्थापित नियमों का पालन नहीं किया। कांग्रेस के सभी विधायकों को बर्खास्त कर दिया गया, जबकि भाजपा के विधायक जो लगातार व्हिप का उल्लंघन कर रहा था, उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है, भला यह कैसा न्याय है।
-अनिल बलूनी, राष्ट्रीय प्रवक्ता भाजपा

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