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UPCL भर्ती परीक्षा परिणामों पर रोक, शासन ने दिए जांच के आदेश
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 26 Apr 2016 07:38 PM IST
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जांच
- फोटो : demopic
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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) की ओर से गत रविवार को आयोजित भर्ती परीक्षा विवादों के घेरे में आ गई है।
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भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर घोटाला किए जाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए शासन ने न सिर्फ परीक्षा परिणामों पर रोक लगा दी है, वरन अपर सचिव ऊर्जा को भर्ती घोटाले की जांच करने और रिपोर्ट प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है। शासन के निर्देश पर अपर सचिव ने भर्ती घोटाले की जांच भी शुरू कर दी है।
सूत्रों की माने तो यदि पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच की गई तो बड़े घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। दूसरी ओर विभागीय अपर सचिव को ही प्रकरण की जांच करने की जिम्मेदारी सौपे जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
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उल्लेखनीय है कि यूपीसीएल की ओर से लेखाधिकारी, विधि अधिकारी, सहायक अभियंता (ई एंड एम) और सहायक अभियंता (सिविल) की भर्ती के लिए देहरादून समेत कई जिलों में भर्ती परीक्षा आयोजित करायी थी।
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भर्ती परीक्षा में 12500 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया जबकि यूपीसीएल अफसरों के मुताबिक 62 फीसदी अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। लेकिन अब यह भर्ती परीक्षा विवादों के घेरे में आ गई है। भर्ती परीक्षा में घोटाला किए जाने के आरोप लग रहे हैं। ऐसे में प्रमुख सचिव ऊर्जा ने भर्ती परीक्षा के परिणामों पर रोक लगाने के साथ ही जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
प्रकरण के जांच की जिम्मेदारी अपर सचिव ऊर्जा अतुल कुमार गुप्ता को सौंपी गई है। भर्ती परीक्षा में घोटाला किए जाने के साथ ही इसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यूपीसीएल अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने पंतनगर विवि के जगह निजी कंसल्टेंट कंपनी एबीसी को भर्ती करने की जिम्मेदारी सौंपी जो पूरी तरह गलत है।
भर्ती की जिम्मेदारी पंतनगर विवि और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को सौंपी जानी चाहिए थी। भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर घोटाला किए जाने के आरोप लग रहे हैं। दूसरी ओर जांच अधिकारी अपर सचिव ऊर्जा ने प्रकरण की जांच भी शुरू कर दी है। उन्होंने यूपीसीएल अफसरों से भर्ती परीक्षा से जुड़े तमाम दस्तावेज तलब किए हैं।
पंतनगर विवि की जगह एबीसी कंसल्टेंसी को सौंपी जिम्मेदारी
उल्लेखनीय है कि यूपीसीएल ने पंतनगर विवि और अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की जगह दिल्ली की निजी कंपनी एबीसी कंसल्टेंट को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी। भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों का कहना है कि श्रेगी दो के अफसरों की भर्ती की जिम्मेदारी निजी कंपनी को कैसे सौंप दी गई।
भर्ती परीक्षा आयोजित कराने के एवज में कंपनी को भारी भरकम भुगतान भी किया गया। यही परीक्षा यदि पंतनगर विवि प्रशासन कराता तो कम खर्च में परीक्षा आयोजित कर सरकारी खजाने को बचाया जा सकता था।
शासन, यूपीसीएल के आला अफसरों की भूमिका पर संदेह
भर्ती परीक्षा को लेकर शासन के अलावा यूपीसीएल के आला अफसरों की भूमिका संदेह के घेरे में हैं। घोटाले के आरोपों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। भाजपा नेताओं ने राज्यपाल और मुख्य सचिव से मिलकर भर्ती परीक्षा मे घोटाले का आरोप लगाते हुए किसी दूसरे विभाग के अफसर से जांच कराने की मांग की थी। लेकिन शासन ने सारी मांगों को दरकिनार विभागीय अपर सचिव को ही जांच सौंप दी है।
भाजपा का कहना है कि विभागीय अफसर को ही जांच सौंपे जाने से लीपापोती की पूरी संभावना है। ऐसे में जांच किसी अन्य विभाग के अफसर को सौंपी जाय।
यूपीसीएल में अभियंताओं, लेखाधिकारियों और विधि सलाहकार को लेकर भर्ती परीक्षा करायी गई है। भर्ती परीक्षा कराने को लेकर टेंडर आमंत्रित किए गए थे। जिसमें पंतनगर विवि ने हिस्सा ही नहीं लिया था। एबीसी कंपनी ने टेंडर की सभी शर्ते पूरी की लिहाजा उन्हें परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब जबकि भर्ती परीक्षा में घोटाले की बात सामने आ रही है तो इसकी जांच करायी जा रही है। अपर सचिव को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। जांच होने तक परीक्षा परिणामों पर रोक लगा दी गई है।
- उमाकांत पंवार, प्रमुख सचिव ऊर्जा