रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज के लिए अहम दिन: एनएमसी में वर्चुअल सुनवाई हुई, आधे घंटे में पूछे 30 सवाल; अब इंतजार
राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर के लिए बृहस्पतिवार अहम रहा, जब एमबीबीएस कक्षाएं शुरू करने की अनुमति के लिए एनएमसी में वर्चुअल सुनवाई हुई। आधे घंटे के सत्र में एनएमसी अधिकारियों ने 30 बिंदुओं पर सवाल पूछे, जिनका कॉलेज प्रशासन ने जवाब दिया।
विस्तार
राजकीय मेडिकल कॉलेज रुद्रपुर के लिए बृहस्पतिवार का दिन खास रहा। एमबीएस की कक्षाएं शुरू करने की अनुमति के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) में वर्चुअल सुनवाई हुई। इसी सुनवाई के आधार पर कॉलेज को नए सत्र के लिए मान्यता मिल पाएगी या नहीं, इसका फैसला होगा। आधे घंटे चले सत्र में एनएमसी के अधिकारियों ने 30 बिंदुओं पर सवाल पूछे जिनके मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने जवाब दिए।
कुछ महीने पहले एनएमसी की टीम ने निरीक्षण में मानकों पर खरा न उतरने के कारण कॉलेज की एमबीबीएस मान्यता रद्द कर दी थी। इसके बाद से कॉलेज प्रशासन मानकों को पूरा करने में जुटा था। कॉलेज ने अब फैकल्टी की कमी दूर कर ली है। वर्तमान में कॉलेज के पास 69 डॉक्टर उपलब्ध हैं। इसके साथ ही पढ़ाई के लिए नए कक्ष और छात्रों के लिए एक हॉस्टल भी बनकर तैयार हो चुका है।
दावा है कि लैब, लाइब्रेरी और अस्पताल में बेड की संख्या भी एनएमसी के मानकों के अनुरूप कर दी गई है। कॉलेज प्रशासन की वर्चुअल सुनवाई में इन्हीं तैयारियों को एनएमसी के सामने रखा।अधिकारियों को उम्मीद है कि कमियों को दूर करने के बाद अब आयोग संतुष्ट होगा और एमबीबीएस की सीटों को हरी झंडी मिल जाएगी।
डॉ. भैसोड़ा ने संभाली प्राचार्य की कुर्सी
मेडिकल कॉलेज से ट्रांसफर होकर आए डॉ. चंद्र प्रकाश भैसोड़ा ने बृहस्पतिवार को रुद्रपुर मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य की कुर्सी संभाल ली। उनका कहना है कि मेडिकल कॉलेज में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का प्रयास किया जाएगा। एमबीबीएस कक्षाएं जल्द शुरू होने की भी उम्मीद जताई।
रुद्रपुर-पिथौरागढ़ मेडिकल कॉलेज शुरू होने पर सवाल
मेडिकल काउंसिलिंग कमेटी (एमसीसी) ने वर्ष 2026 की नीट-यूजी काउंसिलिंग शुरू कर दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. गणेश उपाध्याय का कहना है कि हजारों नीट अभ्यर्थियों के मन में रुद्रपुर और पिथौरागढ़ राजकीय मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस प्रवेश शुरू होने का बड़ा सवाल है। दोनों मेडिकल कॉलेजों का भवन और अधिकांश आधारभूत ढांचा लगभग तैयार है। इन परियोजनाओं पर करोड़ों रुपये की सार्वजनिक धनराशि खर्च हो चुकी है। इसके बावजूद फैकल्टी की कमी के कारण इन्हें आवश्यक मान्यता नहीं मिल सकी है।