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टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल द्रोणासागर का अब तक नहीं हुआ कायाकल्प
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राजकुमार सेठी
- फोटो : KASHIPUR
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काशीपुर। राज्य में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2018 में टिहरी में हुई कैबिनेट बैठक में राज्य के 13 जिलों में पर्यटन हब बनाने के प्रस्ताव पास किए गए थे। इसमें काशीपुर स्थित तीर्थ द्रोणासागर को भी शामिल करने पर इसके विकास की उम्मीद जगी थी। चार साल गुजरने के बाद भी तीर्थ द्रोणासागर का कायाकल्प नहीं हो सका। जबकि यह स्थल ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व रखता है।
बाजपुर रोड स्थित लगभग 9.66 एकड़ में फैले तीर्थ द्रोणासागर के अलावा गोविषाण टीला व चैती मंदिर क्षेत्र को ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व को देखते हुए कैबिनेट ने उक्त स्थल को 13 जिले 13 टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल करने से इस स्थल के कायाकल्प की उम्मीद जगी थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते आज तक उक्त स्थल का कायाकल्प नहीं हो सका। पर्यटन विभाग उक्त स्थल पर स्पेशल स्तंभ भी लगा चुका है।
बताया जाता है कि पांडवों ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के लिए यहां लगभग डेढ़ एकड़ में सरोवर बनाया था। वहीं पहले चारधाम यात्रा पर निकलने वाले यात्री यहां ठहरते थे। यहां से वह रामनगर होते हुए यात्रा पर जाते थे।
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वहीं मान्यतानुसार इस स्थल को सतयुग में कश्यप आश्रम, त्रेतायुग में उज्जनक तीर्थ कहते थे। वहीं यह स्थल भगवान स्कन्द, देवी अरुंधति व महर्षि वशिष्ठ का साधना स्थल रहा है। इसके अलावा महाभारत काल में ऋषिवर द्रोणाचार्य की तपोभूमि भी रही है। बौद्धकालीन सभ्यता का भी यह केंद्र रहा। तुलसीदास ने भी कई बार यहां चर्तुमास व्यतीत किया। जबकि स्वामी दयानंद सरस्वती का ज्ञानस्थल भी यहीं रहा है। बावजूद इसके उक्त तीर्थस्थल का आज तक जीर्णोद्धार नहीं हो सका।
- शासन प्रशासन को टूरिस्ट डेस्टिनेशन योजना में तेजी से काम करना चाहिए। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस योजना को सफल बनाने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते आज तक द्रोणासागर का जीर्णोद्धार नहीं हो सका।
सनत पैगिया
-लगभग चार साल पहले द्रोणासागर को टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल कर लिया गया था। बावजूद इसके आज तक उक्त स्थल का कोई जीर्णोद्धार नहीं हो सका। जबकि यहां घूमने के लिहाज से अन्य कोई पर्यटन स्थल नहीं है।
राजकुमार सेठी
-तीर्थ द्रोणासागर क्षेत्र मेरे वार्ड में आता है। इसलिए मैंने उक्त स्थल पर आमजन के लिए महिला-पुरुष शौचालय बनाने का प्रस्ताव निगम प्रशासन को रखा गया था लेकिन किन्हीं कारणों से वह भी नहीं बन सका। जानकारी करने अब पता चला कि टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तहत शौचालय बनाया जाएगा।
मनोज जग्गा, पार्षद वार्ड 16 सुभाषनगर
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बाजपुर रोड स्थित लगभग 9.66 एकड़ में फैले तीर्थ द्रोणासागर के अलावा गोविषाण टीला व चैती मंदिर क्षेत्र को ऐतिहासिक व पौराणिक महत्व को देखते हुए कैबिनेट ने उक्त स्थल को 13 जिले 13 टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल करने से इस स्थल के कायाकल्प की उम्मीद जगी थी। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते आज तक उक्त स्थल का कायाकल्प नहीं हो सका। पर्यटन विभाग उक्त स्थल पर स्पेशल स्तंभ भी लगा चुका है।
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बताया जाता है कि पांडवों ने अपने गुरु द्रोणाचार्य के लिए यहां लगभग डेढ़ एकड़ में सरोवर बनाया था। वहीं पहले चारधाम यात्रा पर निकलने वाले यात्री यहां ठहरते थे। यहां से वह रामनगर होते हुए यात्रा पर जाते थे।
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वहीं मान्यतानुसार इस स्थल को सतयुग में कश्यप आश्रम, त्रेतायुग में उज्जनक तीर्थ कहते थे। वहीं यह स्थल भगवान स्कन्द, देवी अरुंधति व महर्षि वशिष्ठ का साधना स्थल रहा है। इसके अलावा महाभारत काल में ऋषिवर द्रोणाचार्य की तपोभूमि भी रही है। बौद्धकालीन सभ्यता का भी यह केंद्र रहा। तुलसीदास ने भी कई बार यहां चर्तुमास व्यतीत किया। जबकि स्वामी दयानंद सरस्वती का ज्ञानस्थल भी यहीं रहा है। बावजूद इसके उक्त तीर्थस्थल का आज तक जीर्णोद्धार नहीं हो सका।
- शासन प्रशासन को टूरिस्ट डेस्टिनेशन योजना में तेजी से काम करना चाहिए। वहीं स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस योजना को सफल बनाने में कोई खास रुचि नहीं दिखाई। इसके चलते आज तक द्रोणासागर का जीर्णोद्धार नहीं हो सका।
सनत पैगिया
-लगभग चार साल पहले द्रोणासागर को टूरिस्ट डेस्टिनेशन में शामिल कर लिया गया था। बावजूद इसके आज तक उक्त स्थल का कोई जीर्णोद्धार नहीं हो सका। जबकि यहां घूमने के लिहाज से अन्य कोई पर्यटन स्थल नहीं है।
राजकुमार सेठी
-तीर्थ द्रोणासागर क्षेत्र मेरे वार्ड में आता है। इसलिए मैंने उक्त स्थल पर आमजन के लिए महिला-पुरुष शौचालय बनाने का प्रस्ताव निगम प्रशासन को रखा गया था लेकिन किन्हीं कारणों से वह भी नहीं बन सका। जानकारी करने अब पता चला कि टूरिस्ट डेस्टिनेशन के तहत शौचालय बनाया जाएगा।
मनोज जग्गा, पार्षद वार्ड 16 सुभाषनगर

सनत पैगिया- फोटो : KASHIPUR

काशीपुर स्थित तीर्थ द्रोणासागर का दृश्य- फोटो : KASHIPUR