{"_id":"571138be4f1c1b07174a6c19","slug":"the-water-level-dropped-early-rice-cultivation","type":"story","status":"publish","title_hn":"अगेती धान की खेती ने गिराया जलस्तर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अगेती धान की खेती ने गिराया जलस्तर
अमर उजाला ब्यूरो ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 16 Apr 2016 12:23 AM IST
विज्ञापन
धान का खेत
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्र का आंगन कहा जाने वाला तराई का यह भूभाग इन दिनों गिरते जलस्तर की समस्या से जूझ रहा है। इसके लिए बरसात का कम होना तो वजह है ही, लेकिन इससे बड़ी समस्या यहां के किसानों द्वारा की जा रही अगैती धान की खेती है। जिसमें मोटर, ट्यूबवैल से पानी निकालकर धान रोपने के लिए खेतों में पानी भरा जाता है। भूमिगत पानी के दोहन से जल स्तर लगातार नीचे गिर रहा है।
तहसील क्षेत्र में नगरा तराई, प्रतापपुर, मोहम्मदपुर भुडिया, ससैया, बंडिया क्षेत्र सहित निचले क्षेत्र के खेतों में अगैती धान लगाया जाता है। अगैती धान की खेती में अधिकांश बड़ी जोत के काश्तकार शामिल हैं। अगैती धान की खेती से जमीन का जलस्तर लगातार कम हो रहा है।
विज्ञापन
कुछ क्षेत्रों में हैंडपंप पानी छोड़ चुके हैं। किसानों के खेतों में लगे पंप में भी चार इंच के पाइप में मात्र दो इंच पानी आ रहा है। जल संस्थान के पंपों में पानी दस फीट से नीचे चला गया है। जल संस्थान के एई आरके श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने कॉलम पाइप की व्यवस्था कर रखी है, जिससे पानी लिया जा रहा है।
विज्ञापन
50 फीट नीचे पहुंचा जल स्तर
कृषि अधिकारी एमएस रावत कहते हैं कि कश्तकारों द्वारा अगैती धान की खेती के लिए किए जा रहे पानी के दोहन की वजह से शासन स्तर से इस तरह की खेती पर रोक लगाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस तरह की खेती में पैदावार तो अधिक होती है लेकिन इसके दूरगामी परिणाम सही नहीं है। खेतों में चार से पांच फसलें लेने से फसलों में कीड़े लग जाते हैं, जो समय दवाई या गर्मी से खेतों में लगने वाले कीड़े मरने का होता है उस समय पानी लगने से वह मर नहीं पाते। जिससे बीमारियां फसलों में बनी रहती हैं। जलस्तर बहुत नीचे चला गया है। यहां पहले 10 से 15 फीट पर पानी निकलता था वह अब 50 फीट तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार इस तरह की खेती पर प्रतिबंध नहीं लगाती तब तक वह काश्तकार को खेती से मना नहीं कर सकते। किसानों को स्वेच्छा से इस तरह की खेती से दूर रहना चाहिए। जिससे आने वाले समय में यहां भी पानी की किल्लत हो।