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Pithoragarh: बर्फबारी के सीजन में काली पड़ीं ओम पर्वत और आदि कैलाश की पहाड़ियां

Thu, 22 Jan 2026 11:04 AM IST
गायत्री जोशी दिनेश अवस्थी
दिनेश अवस्थी Published by: गायत्री जोशी Updated Thu, 22 Jan 2026 11:04 AM IST
सार

पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र में सर्दियों के सीजन में बर्फ से लकदक रहने वाले पहाड़ वर्तमान में काले दिखाई दे रहे हैं। इससे ग्रामीण बेहद चिंतित हैं। 

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The hills of Om Parvat and Adi Kailash have turned black during the snowfall season
बर्फबारी नहीं होने से काला पड़ा ओम पर्वत। - फोटो : स्रोत: लक्ष्मी गुंज्याल

विस्तार

पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्र में सड़क और अन्य निर्माण कार्यों के रूप में विकास पहुंचा तो इसका असर क्षेत्र के पर्यावरण पर साफ नजर आने लगा है। इस विकास का खामियाजा स्थानीय लोग भी भुगत रहे हैं। सर्दियों के सीजन में बर्फ से लकदक रहने वाले पहाड़ वर्तमान में काले दिखाई दे रहे हैं। इससे ग्रामीण बेहद चिंतित हैं। ओम पर्वत, पंचाचूली समेत अधिकांश चोटियां इस सीजन में अब तक बर्फबारी नहीं होने से काली नजर आने लगी हैं।

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व्यास घाटी स्थिति ग्राम सभा गुंजी की सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने बताया कि पहले जब सड़क नहीं थी और उच्च हिमालयी क्षेत्र में लोगों की आवाजाही कम थी तब ओम पर्वत, आदि कैलाश की चोटियां बर्फ से लकदक रहती थीं। पिछले छह-सात वर्षों से सड़क एवं अन्य निर्माण कार्य से हिमालयी क्षेत्रों में मौसम काफी प्रभावित हुआ है। वह कहती हैं कि हमें गांवों का विकास, पर्यटन और रोजगार चाहिए। बीआरओ की सड़क बनने से क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल रहा है। इसके साथ ही वह यह भी कहती हैं कि पर्यटन संतुलित होना चाहिए।

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ओम पर्वत और आदि कैलाश क्षेत्र में पर्यटक आस्था की दृष्टि से आएं न कि पिकनिक मनाने। उनका कहना है कि ओम पर्वत तक वाहन ले जाने पर प्रतिबंध होना चाहिए। पर्यटक ट्रेकिंग के जरिए वहां पहुंच सकते हैं। ऊं पर्वत की ऊंचाई 22 हजार फुट है। इसकी जड़ में 17 हजार फुट तक पर्यटक वाहनों से पहुंच रहे हैं। लक्ष्मी गुंज्याल ने बताया कि आदि कैलाश की चोटी में भी इस बार बर्फ कम है। हालांकि अधिक ठंड के चलते गौरी और पार्वती कुंड का पानी जम गया है। उन्होंने बताया कि इस समय गुंजी और अन्य जगहों पर दिन में तेज धूप तो सुबह-शाम कड़ाके की ठंड पड़ रही है। उधर, दारमा घाटी स्थित पंचाचूली की चोटियां भी बर्फबारी न होने से काली पड़ चुकी हैं। संवाद

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पिछले साल आदि कैलाश यात्रा में पहुंचे थे 36,526 यात्री

उच्च हिमालयी क्षेत्र में सड़क बनने से आदि कैलाश और ओम पर्वत दर्शन के लिए बड़ी संख्या में यात्री पहुंचने लगे हैं। कई यात्री तो हिमालयी क्षेत्र में कूड़ा और गंदगी फैलाने से भी गुरेज नहीं करते हैं। पिछले वर्ष 30 मई से शुरू हुई आदि कैलाश यात्रा में 36,526 यात्रियों ने दर्शन किए। इस बार यात्रियों की संख्या और अधिक बढ़ने की उम्मीद है।

पाइप लाइन टूटने में गुंजी में बना है पानी का संकट

10,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित गुंजी गांव की सरपंच लक्ष्मी गुंज्याल ने बताया कि सड़क निर्माण के दौरान उनकी पेयजल लाइन टूट गई है। बारिश और बर्फबारी नहीं होने से आसपास के पानी के स्रोत सूख गए हैं। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी के जवान वाहन के जरिये गर्ब्यांग गांव से पानी की आपूर्ति कर रहे हैं। उनका कहना है कि मार्च से पर्यटक सीजन शुरू हो जाएगा। ऐसे में क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को ठीक नहीं किया गया तो काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

 

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