रुद्रपुर: कल्याणी नदी की जमीन पर हक का दावा खारिज, नगर निगम को राहत
रुद्रपुर की अदालत ने कल्याणी नदी तट की विवादित भूमि पर याचिकाकर्ता की सिविल पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए नगर निगम रुद्रपुर को राहत दी।
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रुद्रपुर में प्रथम अपर जिला न्यायाधीश आरके श्रीवास्तव ने कल्याणी नदी तट की विवादित भूमि पर अधिकार को लेकर चल रहे मामले में याचिकाकर्ता को झटका देते हुए सिविल पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत के आदेश को विधिसम्मत मानते हुए नगर निगम रुद्रपुर को राहत दी है।
मामला ट्रांजिट कैंप क्षेत्र के वार्ड नंबर आठ (पूर्व वार्ड नंबर दो) स्थित कल्याणी नदी तट की भूमि से जुड़ा है। स्थानीय निवासी विनोद ने सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत के 12 नवंबर 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए सिविल पुनरीक्षण दाखिल की थी। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रशासन और नगर निगम उन्हें बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए जबरन बेदखल करने की कोशिश कर रहे हैं।
उनका कहना था कि विवादित जमीन उनकी माता के नाम पट्टे पर थी और वह लंबे समय से वहां रह रहे हैं। विनोद की ओर से मांग की गई थी कि मामले में एक अतिरिक्त वाद बिंदु तय किया जाए। इसमें यह तय होना था कि सिंचाई विभाग की जमीन पर नगर निगम को कार्रवाई या हस्तक्षेप करने का अधिकार है या नहीं। वहीं, राज्य सरकार और नगर निगम ने इसका विरोध किया।
उनका कहना था कि सिंचाई विभाग की ओर से जमीन का कोई पट्टा आवंटित नहीं किया गया है। विभाग की रिपोर्ट में जमीन पर अनधिकृत कब्जा कर सूअर बाड़ा बनाए जाने की बात कही गई थी। अदालत ने सुनवाई के बाद कहा कि निचली अदालत पहले ही यह वाद बिंदु तय कर चुकी है कि वादी विवादित जमीन पर कानूनी रूप से काबिज है या नहीं। ऐसे में अलग से नया वाद बिंदु बनाने की जरूरत नहीं है।
अदालत ने यह भी कहा कि सिंचाई विभाग इस मामले में पक्षकार ही नहीं है। इन आधारों पर अदालत ने विनोद की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा। साथ ही पत्रावली तत्काल निचली अदालत को वापस भेजने के निर्देश दिए।
अब निचली अदालत में चलेगा मामला
अदालत से पुनरीक्षण याचिका खारिज होने के बाद मूल मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ेगी। पत्रावली सिविल जज (सीनियर डिवीजन), रुद्रपुर की अदालत में वापस भेजने के बाद अब मूल वाद में आगे की सुनवाई होगी। ऐसे में याचिकाकर्ता विनोद को अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज और गवाह पेश करने होंगे। इसके बाद नगर निगम रुद्रपुर और राज्य सरकार की ओर से वादी के गवाहों से प्रतिपरीक्षा की जाएगी और प्रतिवादी पक्ष अपना साक्ष्य पेश करेगा। अंत में अदालत पूरे मामले की सुनवाई के बाद अंतिम फैसला सुनाएगी।
रुद्रपुर में नदी किनारे हुए अतिक्रमण के लिहाज से फैसला अहम
कल्याणी नदी की जमीन से जुड़ा यह मामला रुद्रपुर में नदी किनारे हुए अतिक्रमण के लिहाज से अहम माना जा रहा है। शहर में कल्याणी नदी के किनारे कई स्थानों पर लोग लंबे समय से कब्जा कर बसे हुए हैं। ऐसे में अदालत के इस मामले में आने वाले अंतिम फैसले पर भी लोगों की नजर रहेगी। विवादित भूमि को लेकर वादी जहां अपने वैधानिक कब्जे का दावा कर रहे हैं, वहीं प्रशासन और नगर निगम की ओर से इसे अनधिकृत कब्जा बताया गया है। ऐसे में मूल मुकदमे में साक्ष्य और सुनवाई के बाद निचली अदालत का अंतिम फैसला कल्याणी नदी की जमीन पर कब्जे से जुड़े मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।